बेंगलुरु के रियल एस्टेट कारोबारी की ‘आत्महत्या’ को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग

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बेंगलुरु के रियल एस्टेट कारोबारी की 'आत्महत्या' को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग

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  • Publish Date - February 1, 2026 / 01:14 AM IST,
    Updated On - February 1, 2026 / 01:14 AM IST

बेंगलुरु, 31 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के बेंगलुरु में रियल एस्टेट कारोबारी और ‘कॉन्फिडेंट ग्रुप’ के चेयरमैन सीजे राय की कथित आत्महत्या को लेकर शनिवार को राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने आ गईं।

राय ने कथित तौर पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान अपने कार्यालय में खुद को गोली मार ली थी।

आरोप है कि केरल की आयकर टीम की ओर से शुक्रवार दोपहर छापेमारी के दौरान राय ने आत्महत्या कर ली।

इस घटना के बाद कांग्रेस ने आयकर अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए मामले की गहन जांच की मांग की, जबकि भाजपा ने आरोपों को खारिज करते हुए कर अधिकारियों का बचाव किया।

कांग्रेस प्रवक्ता एम लक्ष्मण ने राय से कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा, “उन्हें तीन दिन तक बंद रखने और प्रताड़ित करने की क्या जरूरत थी?”

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने केंद्रीय एजेंसियों पर व्यवसायों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में पिछले 10 वर्षों से यह एक चलन बन गया है।

उन्होंने कहा, “आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और जीएसटी अधिकारियों के जरिये कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है। खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से जुड़े उन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो केंद्र सरकार के आगे नहीं झुकते। यह हमारे राज्य में दूसरी या तीसरी ऐसी घटना है।”

कर्नाटक के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों को अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आर्थिक अपराधों को अन्य अपराधों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें दिवानी मामलों की तरह निपटाया जाना चाहिए। सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को लाकर डर का माहौल बनाना उचित नहीं है।”

वहीं, कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता चलावाड़ी नारायणस्वामी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।

उन्होंने कहा, “मैं राय की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।”

आयकर विभाग का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, “अगर व्यवसायियों की जांच नहीं होगी, तो क्या आयकर विभाग आम लोगों की जांच करे? विभाग को अपना काम करने देना चाहिए।”

भाषा

राखी पारुल

पारुल