कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया, कार्यवाही की मांग की

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया, कार्यवाही की मांग की

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  • Publish Date - April 21, 2026 / 05:27 PM IST,
    Updated On - April 21, 2026 / 05:27 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया और आरोप लगाया कि सदन में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने के बाद उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी दलों पर आक्षेप लगाया, जो सदन के विशेषाधिकार का हनन और अवमानना ​​का गंभीर मामला है।

पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के तहत बिरला को दिए नोटिस में यह आग्रह भी किया कि संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाया जाए, ताकि इस तरह के उल्लंघन को न दोहराया जा सके।

लोकसभा सदस्य वेणुगोपाल ने दावा किया कि बीते 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित नहीं होने के बाद 18 अप्रैल, 2026 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया था और 29 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और विपक्ष के सदस्यों के मतदान के तरीके का प्रत्यक्ष रूप से उल्लेख किया और इसमें निहित उद्देश्यों को जोड़ दिया।

उनके मुताबिक, यह एक स्थापित परंपरा है कि संसद सदस्यों द्वारा संसद में दिए गए भाषणों के संबंध में सदन के बाहर उन पर बात करना, आक्षेप लगाना, उद्देश्यों को लेकर दोषारोपण करना विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​​​है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में यानी 16 और 17 अप्रैल, 2026 को विपक्षी दलों के संसद सदस्य अपनी वास्तविक चिंताएं व्यक्त कर रहे थे। इसके तहत उन्होंने उक्त संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ संसद में अपना वोट डाला।’’

वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय चिंता के एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री के ऐसे संबोधन बहुत कम होते हैं। सरकार द्वारा संसद में अपेक्षित बहुमत न जुटा पाने और विपक्षी दलों की आलोचना करने पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को संबोधित करना अभूतपूर्व है जो अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग है। देश के प्रधानमंत्री का इस तरह का बयान देना सदन के विशेषाधिकार का हनन और अवमानना ​​का गंभीर मामला है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपको (माननीय अध्यक्ष को) सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना और जानबूझकर किए गए विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना ​​का संज्ञान लिया जा सके तथा मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।’’

वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने को लेकर सवाल उठाया जाना न केवल एक व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।’’

उन्होंने आग्रह किया, ‘‘आप (बिरला) संसद की गरिमा और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न दोहराया जाए।’’

वेणुगोपाल के पत्र को टैग करते हुए, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘मेरे वरिष्ठ सहयोगी, केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में प्रधानमंत्री के नापाक मंसूबों के नाकाम होने के बाद राष्ट्र के नाम उनके तथाकथित संबोधन के लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। एक मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन हमेशा राष्ट्रीय एकता और विश्वास निर्माण के सर्वोपरि उद्देश्य के लिए समर्पित होता है।’’

रमेश ने कहा, ‘‘इस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने पक्षपातपूर्ण ढंग से बात की, कांग्रेस पार्टी पर 59 अलग-अलग बार नाम लेकर हमले किए। यह प्रधानमंत्री के रूप में उनके रिकॉर्ड पर एक और स्थायी दाग ​होगा।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने बीते शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चेताया था कि लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण संबंधी संशोधन का विरोध करके उसने जो ‘‘भ्रूण हत्या का पाप’’ किया है, उसके लिए भारत की महिलाएं उन्हें सजा जरूर देंगी।

मोदी ने महिलाओं से माफी मांगी थी और कहा था कि सरकार भले ही विधेयक पारित न करा पाई हो लेकिन वह महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों को कभी नहीं छोड़ेगी।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।

भाषा हक हक पवनेश

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