कांग्रेस महिला आरक्षण को ‘चुनावी चश्मे’ से देख रही : शोभा करंदलाजे

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कांग्रेस महिला आरक्षण को ‘चुनावी चश्मे’ से देख रही : शोभा करंदलाजे

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  • Publish Date - April 11, 2026 / 05:45 PM IST,
    Updated On - April 11, 2026 / 05:45 PM IST

बेंगलुरु, 11 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए विपक्षी पार्टी पर राष्ट्रीय प्रगति को संकीर्ण चुनावी नजरिए से देखने का आरोप लगाया।

करंदलाजे की ओर से यह सियासी हमला ऐसे समय किया गया, जब कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के कदम और उसके समय की आलोचना की है।

उन्होंने राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन करने वाले विधेयक को स्वीकार करने की अपील करते हुए उनसे विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से महिलाओं को नियुक्त करने की अपील की।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, में संशोधन के लिए मसौदा विधेयक को मंजूरी दी है, जिससे लोकसभा में सीट की संख्या बढ़कर 816 करने का प्रस्ताव है। इनमें 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, और इसे 2029 के आम चुनावों में लागू किया जाएगा।

सरकार ने संसद के बजट सत्र को बढ़ा दिया है और 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय बैठक बुलाई है, जिसमें संशोधन विधेयक पारित होने की उम्मीद है।

कांग्रेस ने शुक्रवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर महिला आरक्षण कानून के नाम पर ‘राजनीति करने’ का आरोप लगाया। विपक्षी पार्टी ने कहा कि इससे जुड़ी प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया ‘असंवैधानिक’ है और इसके ‘गंभीर परिणाम’ हो सकते हैं, जिन पर विधानसभा चुनावों के बाद गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

करंदलाजे ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘कांग्रेस हर चीज को चुनाव के चश्मे से देखती है। मुझे नहीं लगता कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर बहस से राज्य विधानसभा चुनावों पर कोई असर पड़ेगा। मल्लिकार्जुन खरगे को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे इस विधेयक के विरोध में थे या अब इस पर चर्चा कर रहे हैं।’’

उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘‘पूर्ववर्ती संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन)सरकार के दौरान महिला आरक्षण पर चर्चा हुई थी… लेकिन इस मुद्दे पर सिर्फ मगरमच्छ के आंसू बहाए गए और उन्होंने कुछ मौकों पर इसका विरोध भी किया। उनके लिए अब ‘महिला’ का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधी है। वे नहीं चाहते कि दूसरी महिलाएं राजनीति में आएं।’’

करंदलाजे ने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी जैसी महिलाओं को छोड़कर आम महिलाओं को संसद में आने देना ही नहीं चाहती। उन्हें अपनी मानसिकता बदलनी होगी, अन्यथा आज की महिलाएं इसे स्वीकार नहीं करेंगी।’’

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि संप्रग सरकार के 10 साल के कार्यकाल के दौरान इस विधेयक को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने सभी क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

भाषा धीरज माधव

माधव