नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कांग्रेस के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली वाली जगह का उनकी जाति के कारण ‘शुद्धिकरण’ किया गया था।
भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर समाज को बांटने के राजनीतिक एजेंडे के लिए ‘झूठ फैलाने’ का आरोप लगाया।
यहां भाजपा मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ताओं सुधांशु त्रिवेदी और गुरु प्रकाश पासवान ने श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के दो सदस्यों के वीडियो चलाए।
इन सदस्यों ने कहा कि खरगे के इस महीने की शुरुआत में हुए कार्यक्रम के बाद वहां किया गया ‘पूजन’ और ‘हवन’ एक ‘सफाई अभियान’ का हिस्सा था, क्योंकि मंच गंदा रह गया था और वहां पास में एक मंदिर भी था।
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के अंकित पाल को एक वीडियो में पत्रकारों से कहते सुना गया, ‘मैं भी अनुसूचित जाति से हूं। मैं वहां मौजूद था। वहां की गई पूजा और हवन सफाई अभियान का हिस्सा थे। मंच पर गंदगी थी। वहां रामलीला होती है। पास में एक मंदिर भी है।”
उन्होंने कहा, “कांग्रेस यह माहौल बना रही है कि हवन दलित विरोधी सोच के कारण किया गया था। कांग्रेस को ऐसा माहौल नहीं बनाना चाहिए। यह किसी की जाति को ध्यान में रखकर नहीं किया गया था। इसमें कोई भेदभाव नहीं था।”
संगठन के एक अन्य सदस्य विनोद आर्य ने भी इसी तरह की बात कही।
उन्होंने कहा कि वह दलित हैं और वहां किसी व्यक्ति के खिलाफ जातिगत भेदभाव के कारण सफाई नहीं की गई थी।
श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन ने आठ अगस्त को हल्द्वानी में खरगे के कार्यक्रम के बाद ‘हवन’ और ‘पूजा’ की थी।
पाल और आर्य के स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी ने कहा, “राहुल गांधी की झूठ और नफरत की दुकान बेनकाब हो गई है।”
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘राहुल गांधी और कितना नीचे गिरेंगे?’
उन्होंने कहा कि ऐसी सफाई व्यवस्था को, जिसका जाति से ‘बिल्कुल कोई संबंध नहीं था’, जाति का मुद्दा बनाना और राजनीतिकरण करना नेता प्रतिपक्ष को शोभा नहीं देता।
बलूनी ने कहा, “इस पूजा-पाठ और सफाई अभियान में शामिल लोग दलित समुदाय से थे। उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। राहुल गांधी, यह हैरान करने वाली बात है कि आप ऐसे झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए शर्म महसूस नहीं करते।”
उन्होंने कांग्रेस नेता से आत्ममंथन करने को कहा।
गढ़वाल से सांसद बलूनी ने आरोप लगाया, “देश के बंटवारे के बाद अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी समाज को बांटने में जुट गए हैं।”
त्रिवेदी ने कहा कि वीडियो से साफ है कि इसमें कोई जातिगत मामला नहीं था।
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी लगातार पितृसत्ता, लैंगिक भेदभाव, क्षेत्र, भाषा और जातिगत भेदभाव जैसे मुद्दे उठाते रहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उनका एकमात्र लक्ष्य हिंदुओं को आपस में बांटना और (लॉर्ड) मैकाले, (कार्ल) मार्क्स और मौलानाओं के एजेंडे को आगे बढ़ाना है।”
त्रिवेदी ने यह सवाल भी किया कि गांधी अब यह मुद्दा क्यों उठा रहे हैं।
उन्होंने पूछा कि क्या वह अपने विदेशी नेटवर्क से किसी संकेत का इंतजार कर रहे थे।
पासवान ने गांधी पर झूठ फैलाने और विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का इतिहास हमेशा ‘दलित विरोधी’ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी इस मुद्दे को कार्यक्रम के 20 दिन बाद क्यों उठा रहे हैं? उन्होंने उस समय प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज कराई?’
पासवान ने कहा कि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन के दो सदस्यों के स्पष्टीकरण के बाद इस मामले में दर्ज कोई भी प्राथमिकी सच्चाई से दूर होगी और असंवैधानिक साबित होगी।
इससे पहले पटना में पत्रकारों से बात करते हुए, भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और खरगे “झूठ बोलने में माहिर” हैं।
प्रसाद ने कहा, “वे झूठ बोलने में माहिर हैं। चाहे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हो या योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली (उत्तर प्रदेश) सरकार, उन्होंने दलितों को पूरा सम्मान दिया है और आरक्षण के लिए संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की है।”
प्रसाद ने कहा, “आज दलितों के लिए नयी विकास योजनाएं हैं और वे स्टार्टअप्स में तरक्की कर रहे हैं। खरगे जी झूठ बोल रहे हैं।”
भाजपा के महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने गांधी की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को सोशल मीडिया पर कुछ ‘लाइक्स’ तो मिल सकते हैं, लेकिन उनके दावों के लिए जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।
संतोष ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “हल्द्वानी का हर नागरिक जानता है कि कांग्रेस की रैली के बाद जो रस्में निभाई गईं, वे उस बैठक के दौरान लगाए गए अलग-अलग नारों की वजह से थीं। जिन लोगों ने ये रस्में निभाईं, उस समूह में कुछ दलित भी शामिल थे।”
उन्होंने कहा, “यह रामलीला मैदान था। राहुल गांधी, आपको कुछ लाइक तो मिल सकते हैं, लेकिन जनता का समर्थन नहीं।”
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश