कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने इस्तीफा वापस लिया

कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने इस्तीफा वापस लिया

कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने इस्तीफा वापस लिया
Modified Date: August 6, 2026 / 05:17 pm IST
Published Date: August 6, 2026 5:17 pm IST

विजयपुरा (कर्नाटक), छह अगस्त (भाषा) कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ नेताओं और अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की अपील के बाद कर्नाटक विधानसभा से अपना इस्तीफा वापस ले लिया है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान किए गए वादे के पूरे न होने से उन्हें दुख तो हुआ, लेकिन वह जीवन भर कांग्रेस के साथ बने रहेंगे और पार्टी नेतृत्व से ‘लॉबिंग’ (पार्टी नेतृत्व से आग्रह, दबाव या संपर्क करके) करके कभी भी कोई राजनीतिक पद नहीं मांगेंगे।

इंडी के विधायक ने तीन अगस्त को विधानसभा सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा था।

पत्रकारों से बातचीत में पाटिल ने कहा कि समर्थकों की भावनात्मक अपील और कांग्रेस नेतृत्व के साथ हुई बातचीत के बाद उन्होंने अपना फैसला बदलने और जनता के प्रतिनिधि के रूप में काम जारी रखने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा, ‘मैंने अपना फैसला बदल दिया है और विधायक के रूप में बने रहने का निर्णय किया है। लोगों ने मुझे यह पद दिया है और मुझे उनके साथ खड़ा रहना चाहिए।’

पाटिल ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह फैसला भी लिया है कि वह भविष्य में किसी पद के लिए किसी के पास जाकर आग्रह नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘अपने जीवन के शेष समय में मैं किसी पद की मांग को लेकर किसी के दरवाजे पर नहीं जाऊंगा। उन्होंने मुझे अपना वचन दिया था। उन्होंने उसे निभाया या नहीं, यह उनका फैसला था। लेकिन जनता के समर्थन के अलावा मैं किसी पद के लिए किसी से संपर्क नहीं करूंगा। जीवन में आत्मसम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।’

पाटिल ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध मंत्री पद नहीं मिलने के कारण नहीं था, बल्कि कथित तौर पर दिए गए आश्वासन को पूरा नहीं किए जाने से था।

उन्होंने कहा, ‘मैं विधायक पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार था, लेकिन कांग्रेस छोड़ने का मेरा कभी इरादा नहीं था। मुझे मंत्री पद नहीं मिलने से दुख नहीं हुआ। मुझे इस बात से चोट पहुंची कि मुझसे एक वादा किया गया था, जिसे अंतिम चरण तक बनाए रखा गया और फिर मुझे बाहर कर दिया गया।’

पाटिल ने कहा कि उन्होंने दो आधारों पर मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की मांग की थी। पहला, पार्टी नेतृत्व की ओर से कथित तौर पर दिया गया आश्वासन और दूसरा, आजादी के बाद से इंडी विधानसभा क्षेत्र को राज्य मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना।

मुख्यमंत्री पद संभालने के दो महीने बाद शिवकुमार ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 19 नए मंत्रियों को शामिल किया था।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश


लेखक के बारे में