प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने किया इंदिरा, राजीव और डेविड लैंग को याद

प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने किया इंदिरा, राजीव और डेविड लैंग को याद

प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच कांग्रेस ने किया इंदिरा, राजीव और डेविड लैंग को याद
Modified Date: July 11, 2026 / 10:27 am IST
Published Date: July 11, 2026 10:27 am IST

नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के बीच शनिवार को दोनों देशों के संबंधों के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में न्यूजीलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड लैंग ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को नयी दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा से उन्हें एक ऐसे ‘‘विशिष्ट व्यक्ति’’ की याद आती है, जिन्होंने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई थी।

रमेश ने कहा कि डेविड लैंग 1984 से 1989 तक न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री रहे और अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली विदेश यात्रा भारत की थी।

उन्होंने कहा कि लैंग का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अच्छा तालमेल रहा और बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ उनके घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध बने।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लैंग ने भारत-न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को पुन: जीवंत किया।

उनके अनुसार, 1950 के दशक में न्यूजीलैंड ने भारत के डेयरी क्षेत्र के विकास और नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना में सहयोग दिया था।

रमेश ने कहा कि ‘श्वेत क्रांति’ के प्रमुख वास्तुकार डॉ. वर्गीज कुरियन को भारत सरकार ने 1952-53 में छात्रवृत्ति पर न्यूजीलैंड भेजा था जिसका उनके जीवन और कार्य पर गहरा प्रभाव पड़ा।

उन्होंने दावा किया कि 1960 और 1970 के दशक में दोनों देशों के संबंधों में ठहराव आ गया था लेकिन लैंग के प्रधानमंत्री बनने के बाद इनमें फिर गति आई।

रमेश ने कहा कि लैंग ने सर एडमंड हिलेरी को भारत में न्यूजीलैंड का उच्चायुक्त नियुक्त किया था।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि नयी दिल्ली के ‘डिप्लोमैटिक एनक्लेव’ में सड़कों के नाम हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे के नाम पर रखे गए हैं।

भाषा हक सिम्मी

सिम्मी


लेखक के बारे में