कोटा/बीकानेर, 11 अप्रैल (भाषा) राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने एक बयान पर शनिवार को सफाई दी और आरोप लगाया कि “षड्यंत्रकारियों” ने उनकी बात को संदर्भ से हटाकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया।
राजे ने शुक्रवार को झालावाड़ में एक जनसभा के दौरान कहा था कि जब कुछ लोग उनसे मदद मांगने आए तो उन्होंने कहा कि वह मदद नहीं कर सकतीं क्योंकि अब उनके बस में कुछ नहीं है।
दिसंबर 2023 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद राजे तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की दावेदार थीं, लेकिन पार्टी ने पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री नियुक्त किया। इस बयान को राजे की अनदेखी संदर्भ में देखा गया, हालांकि राजे ने स्पष्ट किया कि इसका किसी पद से कोई संबंध नहीं है।
बारां में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि छोटे से जनसमूह में कही गई उनकी बात को “पूरी तरह संदर्भ से बाहर” पेश किया गया। उन्होंने बताया कि मामला चार लेन वाली एक राजमार्ग परियोजना से जुड़ा था।
राजे ने कहा कि कुछ लोग उनके पास आए और शिकायत की कि प्रस्तावित राजमार्ग उनकी जमीन से होकर गुजर रहा है और इसके मार्ग में बदलाव किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैं उन्हें समझा रही थी कि धौलपुर में भी एक राजमार्ग मेरे घर के सामने से गुजरा है और मुझे अपनी दीवार पीछे करनी पड़ी है। मेरी जमीन भी प्रभावित हुई। इसलिए मैंने कहा कि जब मैं अपने घर के लिए इसे रोक नहीं सकी, तो आपकी मदद कैसे कर सकती हूं।”
राजे ने आरोप लगाया कि कुछ “शुभचिंतकों” ने लोगों को उनकी बातों पर नजर रखने और उनमें से पंक्तियां चुनकर अलग-अलग अर्थ निकालने के काम पर लगाया है।
उन्होंनें कहा, “ये षड्यंत्रकारी हैं। उन्होंने पहले भी ऐसा किया है और आज भी कर रहे हैं, लेकिन इतने वर्षों में सफल नहीं हुए।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत में किसी पद का उल्लेख नहीं था।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि राजे के काम किए जा रहे हैं।
राठौड़ ने बीकानेर में पत्रकारों से कहा,“ऐसी बातें (कि उनका काम नहीं हो रहा) कभी नहीं हुईं। उनका सारा काम किया जा रहा है। मैंने अभी कुछ मिनट पहले ही उनसे बात की है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका बयान मुख्यमंत्री पद से जुड़ा था, तो राठौड़ ने संकेत दिया कि हर बार किसी एक व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना जरूरी नहीं होता।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री हर बार थोड़े ही कोई… किसको क्या होना है वो तो…,” उन्होंने एक राजस्थानी दोहा भी सुनाया— “चिट्ठी चोरे कोरे मूंग की, मांगे घी और दाल, मोदी सूं क्यूं झगड़ो करे, चिट्ठी कानी नाळ।”
भाषा बाकोलिया जोहेब
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