नयी दिल्ली, चार अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने मध्यप्रदेश में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत की खबरों के बाद छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक समेत 19 दवाओं की विनिर्माण इकाइयों में जोखिम आधारित निरीक्षण शुरू किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने कहा कि सीडीएससीओ ने तीन अक्टूबर को यह निरीक्षण शुरू किया, जिसका उद्देश्य उन कमियों की पहचान करना है जिनके कारण दवा की गुणवत्ता में कमी आई है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रक्रिया में सुधार का सुझाव देना है।
उसने कहा कि इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान, सीडीएससीओ और एम्स-नागपुर के विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम अब भी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और उसके आसपास मौतों के कारणों का आकलन करने के लिए विभिन्न नमूनों और कारकों का विश्लेषण कर रही है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सीडीएससीओ द्वारा जांचे गए छह दवा के नमूने और मध्यप्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एमपीएफडीए) द्वारा जांचे गए तीन नमूने डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) संदूषकों से मुक्त पाए गए, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।
मध्यप्रदेश सरकार के अनुरोध पर, तमिलनाडु खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित श्रीसन फार्मा की निर्माण इकाई से एकत्रित ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप के नमूनों का परीक्षण किया।
मंत्रालय ने कहा,‘‘शुक्रवार देर शाम हमारे साथ परिणाम साझा किए गए… नमूनों में डीईजी की मात्रा स्वीकार्य सीमा से अधिक थी।’’
इसके बाद, तमिलनाडु सरकार ने कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया और इसे बाजार से हटाने का आदेश दिया।
एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा,‘‘ एक अक्टूबर से शहर स्थित कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप की बिक्री पूरे तमिलनाडु में प्रतिबंधित कर दी गई है।’’
भाषा
राजकुमार पवनेश
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