नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने पड़ोसी के घर में घुसकर परिवार के तीन सदस्यों के साथ मारपीट करने के आरोपी पांच लोगों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित करने में नाकाम रहा और उनके मामले में कई अहम विरोधाभास थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यादवेंद्र सिंह ने हरि राम, प्रमीला, सुनीता, हरि किशन और सुनील लाकरा को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452 (चोट पहुंचाने की तैयारी के बाद घर में घुसना), 308 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश) और 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने उन्हें धारा 34 (साझी मंशा) से भी बरी कर दिया।
तीनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 354 (महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से उस पर हमला) और 354बी (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के तहत लगे आरोपों से भी बरी कर दिया गया।
अदालत ने नौ जून के एक आदेश में कहा, ‘‘अभियोजन पक्ष आरोपियों की अपराध में संलिप्तता को किसी भी उचित संदेह से परे साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है…।’’
यह मामला 26 मार्च, 2014 को पश्चिमी दिल्ली के रणहोला इलाके में हुई एक घटना से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसके घर में घुसे, उन्होंनेउसपर एवं उसके दो बेटों पर लोहे की छड़ और डंडों से हमला किया, उसके कपड़े फाड़ दिए तथा उसका शील भंग किया।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला और उसके घायल दो बेटों के बयानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्होंने इस्तेमाल किए गए हथियारों, हर आरोपी की भूमिका और चोटें कैसे लगीं, इस बारे में अलग-अलग बयान दिए थे।
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश