सूरत, 23 जून (भाषा) सूरत की एक अदालत ने गुजरात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक हार्दिक पटेल और चार अन्य लोगों के खिलाफ गैर-कानूनी रूप से एकत्रित होने का मामला वापस लेने की मंगलवार को अनुमति दे दी। यह मामला 2018 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज किया गया था, जिसका नेतृत्व हार्दिक पटेल ने किया था।
यह मामला उन शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा है जिनके तहत कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने सूरत में आरक्षण-समर्थक रैली की अनुमति दी थी।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जितेंद्र सिंह ने वराछा पुलिस थाने में दर्ज इस मामले को वापस लेने की सरकार की याचिका मंजूर की। यह जानकारी भाजपा विधायक के वकील यशवंत वाला ने दी।
प्राथमिकी के अनुसार, पटेल और अल्पेश कथीरिया, धार्मिक मालवीय और अशोक जीरावाला समेत अन्य आरोपियों ने कार्यक्रम के लिए तय शर्तों का उल्लंघन किया।
पुलिस ने उन्हें केवल सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण की अनुमति दी थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने वहां एकत्र समर्थकों को संबोधित किया, जिससे सड़क यातायात बाधित हुआ और अनुमति की शर्तों में से एक का उल्लंघन हुआ।
तब पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और कानूनी आदेश न मानने जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
भाजपा सरकार ने पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़े लगभग 90 प्रतिशत मामलों को वापस लेने की एक अधिसूचना आदेश जारी की थी, जिनमें राजद्रोह के आरोप वाले मामले भी शामिल थे। पिछले साल दिसंबर में सूरत की एक सत्र अदालत ने पटेल और अन्य लोगों के खिलाफ राजद्रोह का मामला वापस ले लिया था।
हार्दिक पटेल वर्ष 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे के तौर पर उभरे थे। इसके तहत गुजरात में पाटीदार समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) दर्जे की मांग की गई थी।
पटेल 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए और 2020 में उन्हें प्रदेश इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 2022 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा और उसी वर्ष विधानसभा चुनाव में अहमदाबाद की विरमगाम सीट से जीत हासिल की।
भाषा अमित माधव
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