अदालत ने आईएलबीएस में ईडब्ल्यूएस के लिए सीमित बिस्तर संबंधी याचिका पर सरकार से रुख पूछा
अदालत ने आईएलबीएस में ईडब्ल्यूएस के लिए सीमित बिस्तर संबंधी याचिका पर सरकार से रुख पूछा
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए अंतः रोगी विभाग में केवल 10 प्रतिशत बिस्तरों और वाह्य् रोगी विभाग (ओपीडी) में 25 प्रतिशत मरीजों को ही मुफ्त उपचार प्रदान करने के यकृत्त एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर बुधवार को दिल्ली सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा है।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी के उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने गैर सरकारी संगठन सोशल जस्टिस की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली सरकार एवं आईएलबीएस को नोटिस जारी किया।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि आईएलबीएस को यह नीति अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती जिससे यह ‘मुख्य रूप से शुल्क-आधारित चिकित्सा संस्थान’ में बदल जाए। आईएलबीएस हेपेटाइटिस, सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर जिगर संबंधी बीमारियों में विशेषज्ञता रखने वाला एक प्रमुख सरकारी वित्त पोषित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय मनमाना, अनुचित और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह अमीर और गरीब मरीजों के बीच भेदभाव और गरीबों के लिए किफायती एवं समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के संवैधानिक अधिकार को नकारता है।
न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई 22 अप्रैल के लिए निर्धारित की और उत्तरदाताओं से अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने को कहा।
भाषा रंजन पवनेश
पवनेश

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