अदालत ने जयदीप सेंगर को उन्नाव हिरासत में मौत मामले में आत्मसमर्पण करने को कहा

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अदालत ने जयदीप सेंगर को उन्नाव हिरासत में मौत मामले में आत्मसमर्पण करने को कहा

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 01:27 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 01:27 PM IST

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन्नाव बलात्कार मामले के दोषी कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उसकी दोषसिद्धि के संबंध में जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने को कहा।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ दोषी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने 10 साल की सजा को निलंबित करके अंतरिम जमानत को और बढ़ाने का अनुरोध किया है।’’

अदालत ने कहा कि जयदीप सेंगर को जुलाई 2024 में दी गई अंतरिम जमानत को आखिरी बार अप्रैल 2025 में बढ़ाया गया था और तब से, पांच तारीखें पड़ने के बावजूद, अदालत द्वारा उसकी अंतरिम जमानत को और बढ़ाने या उसकी सजा को निलंबित करने का कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।

जयदीप सेंगर के वकील ने उसकी सेहत को देखते हुए उसकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया, जिस पर पीठ ने कहा, ‘आप आत्मसमर्पण कीजिए, फिर हम देखेंगे।’

पीठ ने आदेश दिया, ‘‘हालांकि सुनायी गई सजा के अंतरिम निलंबन की अवधि नहीं बढ़ाई गई है, फिर भी उसने आत्मसमर्पण नहीं किया है। सजा निलंबन की अवधि बढ़ाने के उसके आवेदन पर विचार करने से पहले, हम अपीलकर्ता से कहते हैं कि पहले वह आत्मसमर्पण करे।’’

जयदीप सेंगर के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह शनिवार तक आत्मसमर्पण कर देगा। अदालत ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध की।

जयदीप सेंगर (50) ने मुंह के कैंसर से पीड़ित होने के आधार पर जमानत बढ़ाने का अनुरोध किया है।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील ने पहले कहा था कि यह अंतरिम जमानत बढ़ाने का उपयुक्त मामला नहीं है और जयदीप सेंगर द्वारा अपनी याचिका के समर्थन में दी गई जानकारी मनगढ़ंत है।

जयदीप सेंगर ने अपने आवेदन में कहा है कि वह चौथे चरण के मुंह के कैंसर से पीड़ित है, जो एक जानलेवा स्थिति है और उसे कैंसर फिर से उभरने के ​​लक्षण दिखायी दिये हैं। याचिका में कहा गया है कि इस स्थिति के लिए निरंतर और विशेष चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जयदीप सेंगर लगभग चार साल हिरासत में बिता चुका है। उच्च न्यायालय ने 3 जुलाई, 2024 को जयदीप सेंगर को चिकित्सा कारणों से दो महीने की अंतरिम जमानत दी थी।

कुलदीप सेंगर को 20 दिसंबर, 2019 को नाबालिग से 2017 में बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

कुलदीप सेंगर और जयदीप सेंगर को बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में निचली अदालत द्वारा 13 मार्च, 2020 को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

भाषा अमित मनीषा

मनीषा

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