न्यायालय ने अमान्य आय प्रमाण पत्रों के आधार पर ईडब्ल्यूएस कोटा का लाभ देने से इनकार किया

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न्यायालय ने अमान्य आय प्रमाण पत्रों के आधार पर ईडब्ल्यूएस कोटा का लाभ देने से इनकार किया

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 10:30 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 10:30 PM IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के तहत आरक्षण का अनुरोध करने वाले कई उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका को यह कहते हुए सोमवार को खारिज कर दिया कि अमान्य आय प्रमाण पत्र इस तरह के लाभ का दावा करने का आधार नहीं हो सकते।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ पूनम द्विवेदी और अन्य उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी दलील को खारिज कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए पीठ ने कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार, उम्मीदवार संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए वैध ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहे।

अपने आदेश में न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि अपीलकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत प्रमाण पत्र आवेदन के वर्ष से पूर्व के वित्तीय वर्ष से संबंधित नहीं थे और संबंधित वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही जारी किए गए थे, तो उन प्रमाण पत्रों में स्पष्ट त्रुटि थी।’’

आदेश में कहा गया, ‘इसलिए, हमारी राय में, उन प्रमाणपत्रों के आधार पर अपीलकर्ताओं के दावे को उचित तौर पर खारिज किया गया।’’

यह मामला राज्य में महिला स्वास्थ्य कर्मियों के 9,000 से अधिक पदों की भर्ती से संबंधित है, जहां ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाली कुछ उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद अंतिम चयन सूची से बाहर कर दिया गया था।

उम्मीदवारों ने दलील दी कि उनके प्रमाणपत्रों में विसंगतियां इसे जारी करने वाले अधिकारियों की त्रुटियों और लागू वित्तीय वर्ष के संबंध में भ्रम के कारण हुईं। इस दलील को खारिज करते हुए, पीठ ने कहा कि प्रमाण पत्र या तो संबंधित वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले जारी किए गए थे या गलत अवधि से संबंधित थे।

पीठ ने कहा, ‘इस अदालत की राय है कि जब किसी विशेष वित्तीय वर्ष के संबंध में प्रमाण पत्र मांगा जाता है, तो किसी भिन्न वित्तीय वर्ष का प्रमाण पत्र उम्मीदवार की पात्रता का मूल आधार होता है।’

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ उठाने के लिए, आय और संपत्ति का प्रमाण पत्र आवेदन के वर्ष से पहले के वित्तीय वर्ष से संबंधित होना चाहिए और ‘कट-ऑफ’ तिथि तक वैध होना चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि उम्मीदवार गलत प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकारियों को दोषी नहीं ठहरा सकते, खासकर तब जब उनमें से अधिकांश ने विज्ञापन जारी होने से पहले ही दस्तावेज प्राप्त कर लिए थे और पात्रता शर्तों के अनुपालन में नए प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते थे।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप