अदालत का पुलिस को निर्देश : एक महिला से जुड़ी अश्लील सामग्री हटाने के लिये ब्योरा एनसीआरबी को सौंपे

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अदालत का पुलिस को निर्देश : एक महिला से जुड़ी अश्लील सामग्री हटाने के लिये ब्योरा एनसीआरबी को सौंपे

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  • Publish Date - October 22, 2020 / 11:18 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 09:01 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस एजेंसियों को निर्देश दिया है कि 24 वर्षीय एक महिला से जुड़ी हुई अश्लील सामग्री को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को सौंप दे ताकि इंटरनेट से आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए अधिसूचित किया जा सके। जिस समय तस्वीरें ली गई थीं उस समय महिला नाबालिग थी।

उच्च न्यायालय ने फेसबुक और गूगल को आपत्तिजनक सामग्री और यूआरएल को अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया।

इसने पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि एनसीआरबी एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के पास मौजूद प्रोटोकॉल एवं संसाधनों का इस्तेमाल करें ताकि उन व्यक्तियों की पहचान की जा सके जो भारत में इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री फिर से डालते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में यह अदालत संबंधित पुलिस एजेंसियों को निर्देश देती है कि याचिकाकर्ता से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्रियों को एनसीआरबी को सौंपे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एनसीआरबी भी एनसीएमईसी के साथ समझौते के तहत प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर सकता है या आपत्तिजनक सामग्री को अधिसूचित कर सकता है ताकि कार्रवाई हो सके एवं अन्य प्लेटफॉर्म से उन्हें हटाया जा सके।’’

नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन (एनसीएमईसी) एक गैर सरकारी संगठन है जो लापता बच्चों को ढूंढने में मदद करता है, बच्चों का यौन उत्पीड़न कम करने में सहयोग करता है और बच्चों का उत्पीड़न रोकता है।

अदालत का फैसला एक महिला की याचिका पर आया है जो 2012 में 16 वर्ष की थी। तभी उसकी दोस्ती अपनी कक्षा के एक लड़के से हुई और दोनों के बीच संबंध बने।

याचिका में महिला ने बताया कि लड़का बाद में उसे ब्लैकमेल करने लगा और उसे अंतरंग फोटोग्राफ भेजने के लिए बाध्य करने लगा। बाद में उसने उससे संबंध समाप्त कर लिए और उच्च शिक्षा के लिए विदेश चली गई।

बहरहाल, लड़के ने उसे परेशान करना जारी रखा और विदेश भी पहुंच गया जहां उसने उसका गला घोंटने की कोशिश की, जिसके बाद वहां एक अदालत ने उससे संपर्क नहीं रखने का आदेश पारित किया।

महिला ने दावा किया कि 2019 में उसे पता चला कि उस व्यक्ति ने ट्विटर, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उसकी अंतरंग तस्वीरें डाल रखी हैं और ये फोटोग्राफ वही हैं, जिन्हें नाबालिग रहते उसने लड़के को भेजा था।

महिला ने दिल्ली पुलिस की साइबर अपराध शाखा के विशेष प्रकोष्ठ में प्राथमिकी दर्ज कराई और आपत्तिजनक फोटोग्राफ को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी संपर्क साधा।

बहरहाल, जब वेबपेज, यूआरएल नहीं हटाए गए तो उसने राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

भाषा नीरज नीरज दिलीप

दिलीप