नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) अभिनेता शाहरुख खान को बड़ी राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने उनके मुंबई स्थित बंगले ‘मन्नत’ में दो अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण के लिए दी गई तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता की मंशा पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 16 सितंबर 2025 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, ‘‘वे वहां रहते हैं। अगर वे अपने घर में अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण करना चाहते हैं, तो यह उनका फैसला है। कानून का व्यापक रूप से पालन किया गया है। ऐसे में कोई पड़ोसी या कोई अन्य व्यक्ति इसमें दखल क्यों दे?’’
याचिकाकर्ता संतोष दाउंडकर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने दलील दी कि सिर्फ इसलिए इस मामले को अलग नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए कि इसमें एक बड़े फिल्म अभिनेता का नाम जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि संतोष दाउंडकर पूर्व में आदर्श हाउसिंग घोटाले का खुलासा कर चुके हैं और एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
इससे पहले हरित अधिकरण ने दाउंडकर की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण ने शाहरुख खान के बांद्रा स्थित समुद्र तटीय घर के नवीनीकरण के लिए सीआरजेड मंजूरी देने में त्रुटि की है।
अधिकरण ने अपने आदेश में कहा था कि महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दी गई मंजूरी में न तो प्रक्रियागत अनियमितता पाई गई और न ही कोई कानूनी खामी।
भाषा सुभाष मनीषा
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