न्यायालय ने 2023 के डेटा संरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया

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न्यायालय ने 2023 के डेटा संरक्षण कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 01:31 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 01:31 PM IST

नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 के कई प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को केंद्र को नोटिस जारी किया।

‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ और प्रख्यात पत्रकार नितिन सेठी द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि नयी डेटा व्यवस्था सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम को गंभीर रूप से कमजोर करती है और केंद्र को व्यक्तिगत डेटा पर ‘‘व्यापक शक्तियां’’ प्रदान करती है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायाधीश विपुल एम पंचोली की पीठ ने अधिनियम की कानूनी जटिलताओं की जांच पर सहमति जताते हुए विवादित प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि निजता की रक्षा के प्रयास के संबंध में इस अधिनियम में सटीकता और स्पष्टता नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘ छेनी का इस्तेमाल करने के बजाय (विधायिका ने), हथौड़े का प्रयोग किया है और इस तरह (आरटीआई को) गहरा आघात पहुंचाया है।’’

याचिका में कहा गया है कि डीपीडीपी अधिनियम व्यक्तिगत जानकारी के खुलासे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है, जिससे आरटीआई अधिनियम द्वारा स्थापित पारदर्शिता ढांचा प्रभावी रूप से समाप्त हो जाता है।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा