अदालत ने एनसी पर्वतीय स्वायत्त परिषद के दलबदल रोधी कानून को रद्द किया

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अदालत ने एनसी पर्वतीय स्वायत्त परिषद के दलबदल रोधी कानून को रद्द किया

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 07:50 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 07:50 PM IST

गुवाहाटी, 12 मई (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एनसी पर्वतीय स्वायत्त परिषद द्वारा पारित दलबदल रोधी कानून को यह कहते हुए रद्द कर दिया है कि इसे ‘बिना किसी अधिकार क्षेत्र के’ अधिनियमित किया गया था और यह ‘असंवैधानिक’ है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की पीठ ने दीमा हसाओ जिले के कुछ निवासियों द्वारा दायर याचिका पर पारित किया जो परिषद के अधिकार क्षेत्र में आता है।

रिट याचिका में एनसी पर्वतीय स्वायत्त परिषद (42वां संशोधन) अधिनियम, 2017 के नियम 18ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी जिसमें राजनीतिक दलों से दल-बदल के आधार पर परिषद के निर्वाचित सदस्यों को अयोग्य ठहराने का प्रावधान था।

नये नियम में यह प्रावधान किया गया था कि यदि कोई सदस्य किसी राजनीतिक दल से संबंधित है और स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता त्याग देता है; या यदि वह राजनीतिक दल द्वारा जारी किसी निर्देश या व्हिप के विपरीत परिषद में मतदान करता है या मतदान से परहेज करता है, तो वह सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं के साथ-साथ परिषद और सरकार के पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, 7 मई को पारित अपने आदेश में, कानून में किए गए संशोधन को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए रद्द कर दिया।

अदालत ने कहा कि एनसी पर्वतीय स्वायत्त परिषद संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत एक निकाय है तथा एक पूर्ण विधायी निकाय नहीं है और उसके पास सूचीबद्ध विषयों से परे कानून बनाने की क्षमता नहीं है।

भाषा अमित नरेश

नरेश