MP Politics News/Image Credit: IBC24.in
MP Politics News: भोपाल: सड़क पर जहां तक नजर जाए, वहां तक कार ही कार, भारी-भरकम काफिला, गाड़ियों की कतार की ये तस्वीरें मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों की हैं। दरअसल, इन दिनों मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर जारी है और नियुक्ति के बाद भाजपा नेता पदभार ग्रहण करने के दौरान शक्ति प्रदर्शन के लिए लंबे काफिले के साथ राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी– पेट्रोल-डीजल की बचत करने का संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी नेताओं का दिखावा जारी है। इन सबमें अव्वल रहे पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर जो 500 से ज्यादा गाड़ियों का काफिला लेकर उज्जैन से भोपाल पहुंचे। वो जिस रास्ते से गुजरे, वहां जाम ही जाम नजर आया। काफिले वाले शक्ति प्रदर्शन में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जोशी और उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन भी पीछे नहीं रहे। (MP Politics News) इनका भी काफिला राजधानी में सुर्खियों में रहा। बीजेपी नेेताओं के शक्ति प्रदर्शन ने कांग्रेस को बैठे -बिठाए मुद्दा दे दिया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात अब उनके ही कार्यकर्ता नहीं सुन रहे हैं।
तो बीजेपी नेता सफाई देते हुए गाड़ियों के काफिले की बात को ही नकार रहे हैं। मंत्री गौतम टेंटवाल ने कहा कि, कोई भी व्यक्ति काफिला लेकर नहीं पहुंच रहा है बल्कि एक या दो गाड़ियों में ही आ रहे हैं, वह खुद भी एक गाड़ी से ही चल रहे हैं। कांग्रेस भ्रम फैलाने के लिए इस तरह की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करती है।
बीजेपी जहां अपने नेताओं के काफिले वाले शक्ति प्रदर्शन से बैकफुट में आई और लोग पीएम मोदी की अपील को लेकर सवाल पूछने लगे, (MP Politics News) तो कुछ नेताओं में पीएम मोदी की अपील का भी असर देखने को मिला। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर जहां अपने बंगले से मंत्रालय के लिए स्कूटी पर सवारी करते नजर आए, तो लघु उद्योग निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, ई रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। मध्यप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दो टूक कहा कि- सभी बीजेपी नेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का पालन करें।
लेकिन सवाल ये कि – बीजेपी नेता , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील की अनदेखी क्यों कर रहे हैं? (MP Politics News) सवाल ये भी कि- क्या केवल जनता को ही बचत की सीख दी जाती रहेगी, याकि नेताओं पर भी लगाम कसी जाएगी? सबसे बड़ा सवाल ये कि- क्या सरकार मंत्री-विधायकों के काफिलों में कटौती का प्रबंध करेगी?
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