हिंदी को उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए समिति गठित करने संबंधी याचिका खारिज

हिंदी को उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए समिति गठित करने संबंधी याचिका खारिज

हिंदी को उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए समिति गठित करने संबंधी याचिका खारिज
Modified Date: September 25, 2026 / 02:54 pm IST
Published Date: September 25, 2026 2:54 pm IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र को शीर्ष अदालत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार करने और तत्संबंधी सिफारिशें देने के लिए एक आयोग गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि भाषा से जुड़े सुधारों पर पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जा रहा है और इन्हें न्यायिक आदेश के जरिये लागू नहीं किया जा सकता।

यह याचिका ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रा ने दायर की थी। इसमें केंद्र को एक आयोग गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जो उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर सिफारिशें दे।

मिश्रा की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि केंद्र को ऐसा आयोग गठित करने का निर्देश दिया जा सकता है। उन्होंने अपनी दलील के समर्थन में संविधान के विभिन्न प्रावधानों का भी हवाला दिया।

इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले से ही धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से भाषा संबंधी सुधार लागू कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम सभी फैसलों (रिपोर्टों) का संक्षिप्त विवरण हिंदी में दे रहे हैं। इसके बाद हम अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से भी शुरुआत करेंगे।’’ उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत देश की भाषाई संस्कृति को बनाए रखेगी और क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान करेगी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के सुधार न्यायिक आदेशों के जरिये लागू नहीं किए जा सकते।

उन्होंने कहा, ‘‘ये चीजें अदालत के आदेश से नहीं होतीं। ये सुधारों के हिस्से के रूप में धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से होती हैं। हम ऐसे सुधार कर रहे हैं।’’

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने एक आयोग गठित करने का निर्देश देने का आग्रह किया, लेकिन पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश


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