नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘राष्ट्रीय महत्व की सम्मिलित प्रवेश परीक्षा’ (आईएनआई-सीईटी) के तहत परास्नातक पाठ्यक्रम के लिए सीट आवंटित करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से जवाब मांगा है।
तीन जुलाई को न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने एक अभ्यर्थी के पिता की याचिका पर चिकित्सा संस्थान को नोटिस जारी किया और उससे जवाब दाखिल करने को कहा।
याचिकाकर्ता की वकील तन्वी दुबे हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि एम.डी. ऑप्थल्मोलॉजी के लिए उपलब्ध सीट की अंतिम सूची और उसके बाद हुए ‘मॉक राउंड सीट आवंटन’ (वास्तविक रूप से सीट आवंटन से पहले की ‘अभ्यास या ट्रायल’ आधारित सीट आवंटन प्रक्रिया) के बीच एक बड़ी गड़बड़ी थी, जिससे अनारक्षित वर्ग के तहत उपलब्ध सीट की संख्या कम हो गई।
याचिका में कहा गया कि मई में जारी अधिसूचना के अनुसार, एम्स में एम.डी ऑप्थल्मोलॉजी के लिए सीट की अंतिम सूची में कुल 13 सीट उपलब्ध थीं, जिनमें अनारक्षित वर्ग के तहत पांच सीट थीं।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उनकी बेटी ने जुलाई 2026 में आयोजित आईएनआई-सीईटी में 146वीं रैंक हासिल की और काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, लेकिन ‘मॉक राउंड सीट आवंटन’ में केवल दो अनारक्षित सीट प्रदर्शित की गईं। इसके अलावा ‘इंस्टिट्यूशनल प्रेफरेंस’ और ‘बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति’ के लिए एक-एक सीट थीं।
याचिका में कहा गया कि एक बार जब अधिकारी किसी खास वर्ग में सीट की उपलब्धता बताने वाली सीट की अंतिम सूची जारी कर देते हैं, तो वे किसी गुप्त तरीके से सीटों की असल स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर सकते। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।
भाषा संतोष नेत्रपाल
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