आपराधिक अवमानना ​​मामले में अदालत ने केजरीवाल, आप के अन्य नेताओं से जवाब मांगा

आपराधिक अवमानना ​​मामले में अदालत ने केजरीवाल, आप के अन्य नेताओं से जवाब मांगा

आपराधिक अवमानना ​​मामले में अदालत ने केजरीवाल, आप के अन्य नेताओं से जवाब मांगा
Modified Date: May 19, 2026 / 06:18 pm IST
Published Date: May 19, 2026 6:18 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और अन्य से न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘अपमानजनक’ पोस्ट करने के आरोप में शुरू किए गए आपराधिक अवमानना ​​​​मामले में उनका पक्ष जानना चाहा।

न्यायमूर्ति शर्मा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आप नेताओं के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया और उन्हें अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए। कथित अवमानना ​​करने वाले नोटिस प्राप्त होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करेंगे।’’

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को निर्धारित की।

अदालत ने यह भी कहा कि वह इस मामले में एक ‘न्याय मित्र’ नियुक्त करेगी और रजिस्ट्री को कथित आपत्तिजनक प्रकाशनों की एक प्रति सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति शर्मा ने आबकारी नीति मामले से संबंधित मामले में उनके विरुद्ध सोशल मीडिया पर ‘‘अपमानजनक’’ पोस्ट करने के आरोप में केजरीवाल, सिसोदिया और आप के अन्य नेताओं के विरुद्ध 14 मई को आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की थी।

न्यायाधीश ने ‘एक्स’ उपयोगकर्ता देवेश विश्वकर्मा के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही भी शुरू की।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कानूनी उपायों का सहारा लेने के बजाय उन्हें बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया और स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों को आरोप मुक्त किए जाने के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका पर अब दूसरी पीठ सुनवाई करेगी।

न्यायाधीश ने अवमानना ​​के आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई, जिनमें उन पर ‘‘राजनीतिक निष्ठा’’ रखने और ‘‘संबद्धता’’ रखने का आरोप लगाया गया था और वाराणसी के एक शैक्षणिक संस्थान में दिए गए उनके भाषण का एक भ्रामक ‘‘संपादित’’ वीडियो पोस्ट करके उन्हें कथित तौर पर निशाना बनाया गया था।

उन्होंने इस मामले में अदालती कार्यवाही के अंशों के व्यापक प्रसार पर भी ध्यान दिया और कहा कि प्रस्तावित अवमानना ​​करने वाले एक “समानांतर विमर्श” गढ़ रहे थे, और “चुप रहना” न्यायिक संयम नहीं बल्कि “एक शक्तिशाली वादी के सामने आत्मसमर्पण” था।

सुनवाई अदालत ने 27 फरवरी को आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को आरोप मुक्त करते हुए फैसला सुनाया कि मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह से खरा नहीं उतर सकता और पूरी तरह से निराधार हो गया है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की आप नेताओं की याचिकाओं को 20 अप्रैल को खारिज कर दिया, जिसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक ने न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से उनके समक्ष पेश नहीं होंगे और “महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग” का अनुसरण करेंगे।

न्यायमूर्ति शर्मा द्वारा सीबीआई की याचिका को अपने न्यायालय से मुक्त करने के बाद, मामला अब न्यायमूर्ति मनोज जैन के समक्ष है।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश


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