नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में ईसाई समुदाय के लिए नये कब्रिस्तानों और शवों को दफनाने के लिए भूमि आवंटित करने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से उनका रुख पूछा।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में ईसाइयों के केवल पांच कब्रिस्तान हैं, जहां और शवों को दफनाने के लिए जगह नहीं बची है।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ को बताया गया कि जब एमसीडी ने अतिरिक्त भूमि आवंटन के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध को डीडीए को भेजा तो प्राधिकरण ने जवाब दिया कि निजी संस्थाओं को भूमि का आवंटन ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से किया जाता है।
अदालत ने कहा कि मृतकों को दफनाने के लिए जमीन की व्यवस्था करने को किसी व्यावसायिक गतिविधि के समान नहीं माना जा सकता।
उच्च न्यायालय ने ‘लीगल क्रिश्चियन एक्शन कमेटी ऑल इंडिया’ के अध्यक्ष की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि ईसाइयों के लिए एक ऐसे स्थान की व्यवस्था करना जहां वह मृतकों का अंतिम संस्कार कर सके, एमसीडी का प्रमुख दायित्व है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई नवंबर में तय करते हुए कहा एमसीडी को एक स्थिति रिपोर्ट दायर करने को कहा है जिसमें उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले ईसाई कब्रिस्तानों और इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध जगह का पूरा विवरण दिया गया हो।
अदालत ने डीडीए को भी ऐसी एक रिपोर्ट दायर करने को कहा है।
भाषा प्रचेता पवनेश
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