सहयोगी एनसीपीआई के गठबंधन के लिए ज़ोर देने के बावजूद, भाजपा ने बंगाल निकाय चुनाव अकेले लड़ने के संकेत दिए

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सहयोगी एनसीपीआई के गठबंधन के लिए ज़ोर देने के बावजूद, भाजपा ने बंगाल निकाय चुनाव अकेले लड़ने के संकेत दिए

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  • Publish Date - September 2, 2026 / 11:07 PM IST,
    Updated On - September 2, 2026 / 11:07 PM IST

कोलकाता, दो सितंबर (भाषा) भाजपा ने संकेत दिया है कि वह पश्चिम बंगाल में नगर निकाय चुनाव अकेले लड़ना चाहती है। इससे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन में उसकी सहयोगी पार्टी एनसीपीआई के साथ चुनावी गठजोड़ पर सवालिया निशान लग गया है।

एनसीपीआई दिल्ली में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ अपने रिश्ते को राज्य के निकाय चुनावों में भी आगे बढ़ाना चाहती है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने बुधवार को कहा कि पार्टी निकाय चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और “जनता के भारी समर्थन” से निकाय बोर्ड बनाएगी। उनके इस बयान से फिलहाल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ सीट बंटवारे की किसी भी संभावना को लगभग खारिज कर दिया गया है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले एनसीपीआई के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार भी शामिल हैं, ने संकेत दिया था कि पार्टी दिसंबर में संभावित रूप से होने वाले निकाय चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ सकती है।

दोनों दलों के अलग-अलग रुख ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद होने वाले पहले बड़े चुनाव से पहले एक दिलचस्प राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। मई में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था।

भट्टाचार्य ने कहा, “एनसीपीआई एक नई पार्टी है, जिसका गठन हाल ही में हुआ है। उसने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और किसी तरह जीत हासिल की। वह अब राजग में शामिल हो गई है और उसका स्वागत किया गया है। लेकिन यह सब दिल्ली में हुआ है, जो कोलकाता से करीब 1,500 किलोमीटर दूर है। उन्हें कोलकाता तक पहुंचने में समय लगेगा।”

भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने बंगाल में अपनी राजनीतिक जगह किसी अन्य दल के सहारे के बिना बनाई है।

उन्होंने कहा, “भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपने दम पर चुनाव लड़ा और सत्ता तक पहुंची है। न तो किसी की कृपा से, न किसी के आशीर्वाद से और न ही अपनी विचारधारा से समझौता करके।”

इन बयानों को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एनसीपीआई कोई बाहरी दल नहीं है, जो भाजपा के साथ गठबंधन की कोशिश कर रहा हो। वह अब केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक दल है। यह स्थिति तब बनी जब तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने अपनी पार्टी से अलग होकर इस अपेक्षाकृत अनजान दल में अपने गुट का विलय कर दिया।

इसके बाद एनसीपीआई नेताओं का कहना है कि उन्हें राजग सहयोगियों के रूप में पश्चिम बंगाल के निकाय चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए।

घोष दस्तीदार ने कहा था, “हम भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सबसे बड़े घटक दल हैं। इसलिए चुनाव के दौरान हम राजग के सदस्यों के रूप में चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हमें भाजपा के साथ गठबंधन करना होगा। चुनाव नजदीक आने पर इस बारे में फैसला लिया जाएगा, लेकिन गठबंधन होने की पूरी संभावना है।”

बंद्योपाध्याय ने भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के साथ शुरुआती बातचीत की है।

हालांकि, भाजपा ने इस तरह के किसी भी गठबंधन के लिए अपने दरवाजे बंद रखे हैं।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन