कासरगोड (केरल), पांच जुलाई (भाषा) कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने रविवार को दावा किया कि केरल विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष का पद देने की मांग को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से मतभेद के कारण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) एलडीएफ के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार विचार कर सकती है।
उन्नीथन ने यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन के हाल के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उपनेता प्रतिपक्ष के पद की मांग का मामला अब खत्म हो चुका है और यह पद भाकपा को नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भाकपा ने सार्वजनिक रूप से इस रुख को खारिज करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर फैसला विजयन या माकपा अकेले नहीं कर सकते और भाकपा अपनी मांग से समझौता नहीं करेगी।
उन्नीथन ने कहा, “विपक्ष में टकराव शुरू हो गया है। मुझे नहीं पता कि यह कहां जाकर खत्म होगा। जैसे 1969 में भाकपा गठबंधन से अलग हो गई थी, अगर पार्टी को लगता है कि वह अपना आत्मसम्मान छोड़कर एलडीएफ में नहीं रह सकती, तो उसके यूडीएफ के बारे में सोचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने दावा किया कि भाकपा और माकपा नेताओं के बयान गठबंधन में बढ़ते मतभेदों को दिखाते हैं।
उन्होंने कहा, “वे रेलवे की दो पटरियों की तरह हैं, जो कभी नहीं मिलतीं। वे अलग-अलग रहती हैं। ये घटनाक्रम आखिरकार इस गठबंधन के टूटने का कारण बनेंगे।”
विधानसभा चुनाव के बाद उपनेता प्रतिपक्ष पद की भाकपा की मांग की वजह से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में मतभेद पैदा हो गए हैं। एक ओर विजयन का कहना है कि यह मामला खत्म हो चुका है, वहीं भाकपा नेताओं का कहना है कि यह मुद्दा अब भी बरकरार है और इस पर एलडीएफ में चर्चा होनी चाहिए।
भाषा जोहेब नरेश
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