केरल की सत्ता में यूडीएफ की वापसी रोकने के लिए माकपा, भाजपा के बीच सांठगांठ : एंटनी

Ads

केरल की सत्ता में यूडीएफ की वापसी रोकने के लिए माकपा, भाजपा के बीच सांठगांठ : एंटनी

  •  
  • Publish Date - March 31, 2026 / 07:07 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 07:07 PM IST

तिरूवनंतपुरम, 31 मार्च (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ए. के. एंटनी ने केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भाजपा के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए दावा किया कि दोनों पक्ष संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को सत्ता में वापस आने से रोकने में जुटे हुए हैं।

एंटनी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों पार्टियों के बीच ‘‘अंदरूनी तनाव’’ के स्पष्ट संकेत हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की नयी दिल्ली की यात्राओं के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में किये गए ‘‘असामान्य रूप से गर्मजोशी भरे स्वागत’’ की ओर इशारा किया।

उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सहित राष्ट्रीय स्तर के नेता यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यूडीएफ केरल की सत्ता में वापस न आए।

एंटनी ने कहा कि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए वे (भाजपा) कुछ सीटों पर मार्क्सवादी पार्टी को समर्थन देंगे और इस तरह की व्यवस्था एकतरफा नहीं हो सकती, और स्वाभाविक रूप से बदले में कुछ समर्थन भी मिलेगा।

हालांकि, पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा कि इस बार ऐसी रणनीति सफल नहीं होगी।

राज्य में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव में यूडीएफ को निर्णायक जीत मिलने का दावा करते हुए, एंटनी ने कहा कि जनता का रुख पहले ही सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के खिलाफ हो चुका है।

विजयन पर तीखा हमला करते हुए, एंटनी ने उन्हें एक ‘‘अदृश्य मुख्यमंत्री’’ बताया, जो उनके अनुसार आम आदमी की पहुंच से बाहर रहे और मुख्य रूप से केवल जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से ही दिखाई दिए।

उन्होंने तर्क दिया कि विजयन को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने का एलडीएफ का प्रयास उसे नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘तीसरे कार्यकाल का नारा ही मतदाताओं को यूडीएफ की ओर आकर्षित करने के लिए काफी है। यहां तक ​​कि कई पारंपरिक वामपंथी समर्थक भी मौजूदा सरकार को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं।’’

केरल के तीन बार के मुख्यमंत्री ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि उसकी विचारधारा इस राज्य के लिए उपयुक्त नहीं है, जिसे सांप्रदायिक सद्भाव के लिए जाना जाता है।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश