एलडीएफ की नींव में दरारें 2024 के आम चुनाव के बाद पड़ीं, फिर खड़ा करने की जरूरत: माकपा नेता

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एलडीएफ की नींव में दरारें 2024 के आम चुनाव के बाद पड़ीं, फिर खड़ा करने की जरूरत: माकपा नेता

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 12:23 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 12:23 PM IST

अलप्पुझा (केरल), सात मई (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता ए एम आरिफ ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही एलडीएफ की बुनियाद में बड़ी दरारें आ गईं और इस कारण ही विधानसभा चुनाव में उसकी हार हुई। उन्होंने पार्टी को फिर से खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया।

आरिफ ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन द्वारा की गई कथित सांप्रदायिक टिप्पणियों का विरोध करने में पार्टी विफल रही।

एलडीएफ के लिए विधानसभा चुनाव परिणाम को एक बड़ी हार मानते हुए माकपा नेता ने यहां एक टीवी चैनल से कहा कि हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और वामपंथी दलों ने हार के बाद सत्ता में वापसी की है।

उन्होंने कहा कि वर्षों जीत और हार का चक्र चला लेकिन इसका एलडीएफ की बुनियाद पर कभी कोई असर नहीं पड़ा।

अलुवा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार रहे आरिफ ने कहा, ‘‘हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से एलडीएफ की नींव में दरारें उभरने लगीं। यही पार्टी का मत है।’’

अलुवा में वह कांग्रेस नेता अनवर सदात से 29,143 वोटों के अंतर से पराजित हुए।

उन्होंने कहा कि लगातार सत्ता में रहने के कारण पिनराई विजयन पर आरोपों की बाढ़ आ गई, लेकिन बेहतरीन साइबर सिस्टम होने के बावजूद पार्टी उसी तरह से पलटवार नहीं कर सकी।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, हमने भी सिर्फ पिनराई विजयन पर ही ध्यान केंद्रित किया। जैसे-जैसे उन पर हमले बढ़ते गए, सिर्फ विजयन के पोस्टर ही दिखाई देते रहे और इससे विपक्ष को अपने हमलों को आकार देने में मदद मिली वहीं एलडीएफ इसका ठीक से बचाव करने में विफल रहा।’’

उन्होंने कहा, ‘हमें यह समझना होगा कि प्रतिद्वंद्वी कितना मजबूत है और उसी के अनुसार उनका मुकाबला करने के लिए कदम उठाने होंगे। तभी हम वापसी कर सकते हैं।’

नतेसन की कथित सांप्रदायिक टिप्पणियों के संबंध में आरिफ ने कहा कि पार्टी में यह धारणा थी कि एसएनडीपी नेता को संरक्षण दिया जा रहा है और उनकी टिप्पणियों का विरोध नहीं किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उनकी टिप्पणियों का कड़ा विरोध करने में कुछ कमियां थीं।’’

विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 140 सीटों में से 102 सीट जीतीं, जबकि एलडीएफ को केवल 35 सीट मिलीं और तीन सीट भाजपा ने हासिल कीं।

भाषा शोभना वैभव

वैभव