मेरे दिल ने जो कहा वह मैंने किया : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों की सेवा कर बच्चा बना मिसाल

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मेरे दिल ने जो कहा वह मैंने किया : ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैनिकों की सेवा कर बच्चा बना मिसाल

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  • Publish Date - May 7, 2026 / 03:39 PM IST,
    Updated On - May 7, 2026 / 03:39 PM IST

फिरोजपुर, सात मई (भाषा) भारत द्वारा पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ पिछले साल मई में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब के दूर-दराज के गांव के एक 11 वर्षीय बच्चे ने सेना की मदद कर पूरे देश को प्रेरित किया और देशभक्ति की मिसाल पेश की।

पंजाब के फिरोजपुर के तरणवाली गांव के शावन सिंह ने लगभग एक साल पहले पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित अपने गांव में तैनात सेना के जवानों की स्वेच्छा से सेवा की, और उन्हें अपने घर से चाय, पानी, दूध और लस्सी लाकर दी।

ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर शावन ने कहा कि उसने सिर्फ अपने दिल की बात सुनी।

उन्होंने कहा, ‘‘जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो सैनिक हमारे गांव आए, मुझे लगा कि मुझे उनकी सेवा करनी चाहिए क्योंकि वे हमारे लिए लड़ रहे थे।’’

गांव में तैनात सैनिकों के बीच शावन पानी, चाय और छाछ के साथ मनमोहक मुस्कान की वजह से अजीज बन गया था।

शावन ने कहा, ‘‘मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि मुझे इसके लिए सम्मानित किया जाएगा।’’

शावन के पिता सोना सिंह ने कहा कि परिवार को अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उनके बेटे को इतना सम्मान मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘हम भारतीय सेना के बहुत आभारी हैं कि उन्होंने उसे प्रोत्साहित किया और उसके योगदान को सराहा। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारा बेटा एक दिन भारत के राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करेगा और उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने का अवसर मिलेगा।’’

पिता ने बताया कि शावन को विभिन्न कार्यक्रमों और सार्वजनिक आयोजनों में आमंत्रित किया जाता है, लेकिन वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा है और भविष्य में सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव के मद्देनजर शावन के प्रयासों को काफी सराहना मिली। उस समय उसने दुश्मन के ड्रोन हमले और सीमा पार से गोलाबारी के खतरे की परवाह किये बिना अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की सेवा की और उनके शिविरों में जाकर पानी, छाछ और चाय आदि पहुंचायी।

भीषण गर्मी और तनाव के बावजूद 11 साल के इस बच्चे ने लंबे समय से इलाके में तैनात सैनिकों की सेवा की। उसके इस जज्बे की सेना के अधिकारियों के साथ-साथ ग्रामीणों भी भूरि-भूरि प्रशंसा की।

उसकी देशभक्ति की भावना और निस्वार्थ समर्पण को सम्मानित करते हुए सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने उसे ‘‘सबसे कम उम्र के असैन्य योद्धा’’ के खिताब से नवाजा।

सेना ने पिछले साल जुलाई में शावन की शिक्षा का खर्च भी उठाने का फैसला किया ताकि वित्तीय बाधाएं उसके सपने को पूरा करने में रुकावट न बनें। उसका सपना सेना में शामिल होना है।

पिछले साल दिसंबर में, शावन की प्रेरणादायक सेवा राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आई जब उसे नयी दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय सेना ने पिछले साल छह मई की देर रात पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ बहावलपुर और मुरीदके में लश्कर-ए-तैबा का अड्डा शामिल था।

भाषा धीरज नरेश

नरेश