हिरासत में मौत का मामला: कुलदीप सेंगर को मृत्युदंड देने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज

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हिरासत में मौत का मामला: कुलदीप सेंगर को मृत्युदंड देने का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज

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  • Publish Date - April 21, 2026 / 12:24 AM IST,
    Updated On - April 21, 2026 / 12:24 AM IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को मृत्युदंड देने का अनुरोध किया था।

अदालत ने पाया कि पीड़िता 1,945 दिनों की देरी को माफ करने के लिए ‘पर्याप्त कारण’ प्रस्तुत करने में विफल रही।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने फैसला सुनाया कि इस मामले में कुलदीप सेंगर, उनके भाई जयदीप सेंगर और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराने तथा सजा सुनाने के अधीनस्थ न्यायालय के 2020 के फैसले के खिलाफ अपील 1945 दिनों की ‘अस्पष्ट’ देरी के बाद दायर की गई थी।

पीठ ने इसे ‘जानबूझकर दिखाई गई निष्क्रियता और लापरवाही’ का मामला बताते हुए कहा कि मृतक की बेटी को परिणाम की जानकारी थी और वह संबंधित कार्यवाही में “सक्रिय रूप से भाग ले रही थी” लेकिन “कानूनी सलाह के बावजूद उसने जानबूझकर अपील के वैधानिक उपाय का निर्धारित समय के भीतर लाभ नहीं उठाया।”

पीठ ने कहा कि सजा और दोषसिद्धि बढ़ाने की मांग वाली विलंबित अपील पर विचार करने से आरोपी के अधिकारों का गंभीर नुकसान होगा क्योंकि मुकदमे की समाप्ति के काफी समय बाद भी उसे लंबे समय तक चलने वाली मुकदमेबाजी की अनिश्चितता और गंभीर दंडात्मक परिणामों की संभावना का सामना करना पड़ेगा।

पीठ ने कहा, “अर्जी में बताए गए कारण, जैसे कि वित्तीय बाधाएं, आवास संबंधी समस्याएं, कथित शारीरिक दुर्बलता और धमकियों या उत्पीड़न के आरोप, विलंब क्षमादान के आवेदन पर विचार करते समय विश्वास नहीं जगाते।”

पीठ ने कहा, “ये कारण अस्पष्ट हैं, किसी भी दस्तावेजी साक्ष्य से समर्थित नहीं हैं और यह भी नहीं पता चलता कि ऐसी परिस्थितियां कितने समय तक बनी रहीं। बिना प्रमाण के मात्र दावे ‘पर्याप्त कारण’ नहीं हो सकते।”

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन