डी. सुधाकर : संघर्ष और जनसरोकारों से गढ़ी विरासत

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डी. सुधाकर : संघर्ष और जनसरोकारों से गढ़ी विरासत

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  • Publish Date - May 10, 2026 / 03:00 PM IST,
    Updated On - May 10, 2026 / 03:00 PM IST

बेंगुलरु, 10 मई (भाषा) कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री डी. सुधाकर का लंबी बीमारी के बाद रविवार को निधन हो गया। जमीनी राजनीति, सहज जनसंपर्क और दशकों तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे सुधाकर अपने पीछे संघर्ष और जनसेवा से गढ़ी एक मजबूत राजनीतिक विरासत छोड़ गए हैं।

सुधाकर (66) पिछले करीब दो माह से फेफड़ों के संक्रमण के इलाज के लिए कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (केआईएमएस) में भर्ती थे, जहां रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

जैन समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हिरियूर से कांग्रेस विधायक सुधाकर ने बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया, लेकिन मध्य कर्नाटक के लोगों के साथ उनका गहरा जुड़ाव हमेशा बना रहा।

चित्रदुर्ग जिले के चल्लाकेरे में जन्मे सुधाकर ने प्रारंभिक शिक्षा वहीं से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने शिवमोगा के राष्ट्रीय महाविद्यालय से वाणिज्य में स्नातक की डिग्री हासिल की। राजनीति का माहौल उन्हें परिवार से ही मिला था।

सुधाकर ने औपचारिक रूप से 2004 में चुनावी राजनीति में कदम रखा और चल्लाकेरे विधानसभा सीट से जीत हासिल की।

चल्लाकेरे सीट 2008 में सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक क्षेत्र बदलकर हिरियूर का रुख किया और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे। यह फैसला उनके राजनीतिक साहस और मतदाताओं के साथ उनके व्यक्तिगत भरोसे को दर्शाता था।

हिरियूर से जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा और भारतीय जनता पार्टी को समर्थन दिया। बाद में वह भाजपा सरकार में मंत्री भी बने।

उन्होंने 2013 में कांग्रेस में वापसी की और हिरियूर से फिर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसी दौरान उन्हें कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उन्होंने कर्नाटक राज्य विद्युत विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और प्रौद्योगिकी तथा औद्योगिक विकास से जुड़ी पहलों में सक्रिय भूमिका निभाई।

हालांकि 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा की पूर्णिमा के हाथों हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वह राजनीति में सक्रिय रहे और क्षेत्र से उनका जुड़ाव कायम रहा। इसके बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उनकी वापसी ने हिरियूर में उनके स्थायी प्रभाव को फिर साबित किया।

कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद उन्हें सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बनाया गया। साथ ही वह चित्रदुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सुधाकर के साथ उनका रिश्ता केवल राजनीति तक सीमित नहीं था।

खरगे ने कहा, “मेरी उनके पिता से भी गहरी मित्रता थी। जब कोई करीबी अचानक इस तरह चला जाता है तो दुख गहरा हो जाता है। आज मैं ऐसी पीड़ा में हूं जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने कहा कि सुधाकर बेहद सक्रिय और जनोन्मुख नेता थे, जिनके पास अभी जनता के लिए बहुत कुछ करने का अवसर था।

खरगे ने ‘एक्स’ पर लिखा, “मन यह मानने को तैयार नहीं है कि इतनी कम उम्र में वह हमें छोड़कर चले गए।”

उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने वाले सुधाकर ने अपनी सक्रियता और ऊर्जावान व्यक्तित्व से लोगों का ध्यान आकर्षित किया था।

खरगे ने यह भी कहा कि जिस क्षेत्र से वह चुनाव लड़ते थे वहां उनके अपने समुदाय की आबादी बहुत कम थी, लेकिन धर्मनिरपेक्ष सोच और जनता के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने लोगों का स्नेह और भरोसा जीता।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सुधाकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह खबर सुनकर उन्हें बड़ा दुख हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह अस्पताल में सुधाकर से मिले थे, तब उन्हें लगा था कि वह ठीक हो जाएंगे।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सुधाकर जनसेवा के प्रति गहरा सरोकार रखने वाले और समर्पित रहने वाले व्यक्ति थे। ऐसे व्यक्ति को और कई वर्षों तक लोगों के बीच रहना चाहिए था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों और हम सबकी दुआओं के बावजूद सुधाकर आज हमें छोड़कर चले गए। यह अत्यंत पीड़ादायक क्षण है।’’

सुधाकर के परिवार में उनकी पत्नी हर्षिणी, बेटी स्पूर्ति और बेटा सुहास हैं।

भाषा खारी प्रशांत

प्रशांत