दार्जिलिंग की मशहूर टॉय ट्रेन को 145 वर्षों में पहली बार महिला टिकट परीक्षक मिली

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दार्जिलिंग की मशहूर टॉय ट्रेन को 145 वर्षों में पहली बार महिला टिकट परीक्षक मिली

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 11:55 AM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 11:55 AM IST

(अमिताव रॉय)

(फोटो के साथ)

दार्जिलिंग, 12 फरवरी (भाषा) संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा विश्व धरोहर घोषित की गई दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) को 145 वर्ष के उसके इतिहास में पहली महिला टिकट परीक्षक मिली है।

पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) की अनुभवी कर्मचारी सरिता योलमो ने पांच फरवरी को अपनी नयी भूमिका में पहली बार न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक टॉय ट्रेन में सफर किया।

योलमो ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ‘‘दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन के इतिहास में पहली महिला टीटीई होने पर मुझे गर्व है।’’

डीएचआर की अधिकारी प्रतीक्षा छेत्री ने इसकी पुष्टि की कि योलमो टॉय ट्रेन सेवा में पहली महिला टीटीई के रूप में कार्यरत हैं।

योलमो ने कहा कि जब उन्हें यूनेस्को की विरासत रेलवे सेवा में काम करने का अवसर मिला तो उन्हें रोमांच महसूस हुआ और जिम्मेदारी का भी एहसास हुआ।

योलमो ने कहा, ‘‘मैं दार्जिलिंग से हूं, लेकिन मुझे डीएचआर में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था।’’ उन्होंने कहा कि वह पहले एक यात्री के रूप में टॉय ट्रेन में यात्रा कर चुकी हैं।

वह वर्तमान में एनजेपी-दार्जिलिंग मार्ग पर एकमात्र महिला टीटीई हैं, यह यात्रा एक तरफ से लगभग आठ घंटे की होती है और रास्ते में देरी के कारण कभी-कभी इसमें अधिक समय भी लग सकता है।

योल्मो रोजाना एनजेपी और दार्जिलिंग के बीच चलने वाली ट्रेन सेवा में अपनी बारी आने पर ड्यूटी पर जाती हैं। वह एनजेपी से सुबह की ट्रेन में सवार होती हैं और अगले दिन पर्वतीय शहर में रात भर रुकने के बाद लौट आती हैं। दार्जिलिंग को ‘पहाड़ों की रानी’ कहा जाता है।

एनजेपी-दार्जिलिंग मार्ग के लिए यात्रा टिकट परीक्षकों (टीटीई) की नियुक्ति एनजेपी स्थित मुख्य यात्रा टिकट निरीक्षक (सीटीटीआई) कार्यालय द्वारा की जाती है, जहां योलमो तैनात हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे ट्रेनों में टीटीई के रूप में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, फिर भी मैंने हिम्मत की और टॉय ट्रेन सेवा में टीटीई की जिम्मेदारी संभाली।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अपनी पहली यात्रा में मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन यात्रा पूरी करने और दार्जिलिंग पहुंचने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगा।’’

भाषा सुरभि अमित

अमित