नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विधानसभा परिसर में स्थित एक ‘फांसीघर’ की प्रामाणिकता से संबंधित मामले में सदन के समक्ष पेश न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित आम आदमी पार्टी (आप) के चार नेताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष रामनिवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़ला ने ‘‘जानबूझकर’’ और ‘‘स्वेच्छा’’ से इस मामले की कार्यवाही से दूर रहने का विकल्प चुना।
‘फांसीघर’ विवाद आप और भाजपा के बीच दिल्ली विधानसभा के एक पुनर्निर्मित हिस्से को लेकर है, जिसके बारे में आप ब्रिटिश काल का फांसीघर होने का दावा करती है, जबकि भाजपा का दावा है कि यह एक ‘टिफिन कक्ष’ था।
संबंधित स्थल का जीर्णोद्धार कराए जाने के बाद 2022 में सिसोदिया, राखी बिड़ला और गोयल की उपस्थिति में तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ‘फांसीघर’ के हिस्से के रूप में इसका उद्घाटन किया था।
इस साल अगस्त में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान, भाजपा ने अपने इस दावे को दोहराया कि संबंधित जगह को ऐतिहासिक ‘फांसीघर’ बताकर लोगों को गुमराह किया गया, जबकि वास्तव में यह ब्रिटिश-युग के विधानसभा भवन में एक ‘टिफिन कक्ष’ था।
इस मुद्दे को विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया गया, जिसने 9 सितंबर, 2025 को आम आदमी पार्टी के चार नेताओं को पत्र जारी कर उनसे ‘‘फांसीघर के अस्तित्व की प्रामाणिकता’’ के संबंध में अपनी लिखित टिप्पणियां भेजने का अनुरोध किया।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि आम आदमी पार्टी के चारों नेताओं ने अपने जवाब में समिति के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी और दावा किया कि विशेषाधिकार का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।
बाद में, केजरीवाल और सिसोदिया ने समिति के पत्र, नोटिस और समन को रद्द करने का आग्रह करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की।
रिपोर्ट में कहा गया कि आम आदमी पार्टी के नेता 13 नवंबर और 20 नवंबर, 2025 को भी समिति के सामने पेश नहीं हुए।
इसमें कहा गया कि आम आदमी पार्टी के नेता ‘फांसीघर’ के उद्घाटन से संबंधित घटनाक्रम से भली-भांति परिचित थे, और यह उनका कर्तव्य है कि वे समिति के समक्ष उपस्थित हों तथा संरचना से संबंधित दावे की सत्यता का पता लगाने में उसकी सहायता करें।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आम आदमी पार्टी के संबंधित चारों नेताओं का समिति के समक्ष पेश न होने का निर्णय सदन और इसकी समिति की अवमानना के बराबर है।
समिति की रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘सिफारिश की जाती है कि सदन अरविंद केजरीवाल, रामनिवास गोयल, मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला के खिलाफ 13 नवंबर तथा 20 नवंबर, 2025 को विशेषाधिकार समिति की निर्धारित बैठकों में बिना किसी उचित कारण या समिति से अनुमति के बिना जानबूझकर अनुपस्थित रहने को लेकर उचित कार्रवाई करे।’’
इसमें कहा गया कि समिति, हालांकि, ‘फांसीघर’ की प्रामाणिकता से संबंधित मुख्य मुद्दे की जांच जारी रखेगी और अगले सत्र में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
भाषा
नेत्रपाल पवनेश
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