दिल्ली : अदालत ने वन्यजीव अपराध मामले में शहतूश शॉल व्यापारी को दोषी करार दिया

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दिल्ली : अदालत ने वन्यजीव अपराध मामले में शहतूश शॉल व्यापारी को दोषी करार दिया

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 06:11 PM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 06:11 PM IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जयपुर स्थित एक आर्ट गैलरी के मालिक को लुप्तप्राय तिब्बती मृग के फर से बने शहतूश शॉल के अवैध निर्यात की कोशिश के मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने माना कि आरोपी ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 का उल्लंघन किया है। पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

राउज एवेन्यू जिला न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 2008 के एक मामले में 12 मार्च को जयपुर स्थित इंडियन आर्ट गैलरी के मालिक सैयद शाहिद अहमद कशानी के खिलाफ फैसला सुनाया।

अधिकारी ने बताया, ‘‘तिब्बती मृग, जिसे स्थानीय रूप से चिरू के नाम से जाना जाता है, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है और घरेलू कानून के तहत इसका व्यापार सख्ती से प्रतिबंधित है। भारत ने जिस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, उसके तहत शहतूश शॉल का व्यापार भी 1975 से वैश्विक स्तर पर वन्यजीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संधि (सीआईटीईएस) के तहत प्रतिबंधित है।’’

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्यात की गई एक खेप में 1,290 शहतूश शॉल की पहचान की और उसके बाद फरवरी 2009 में सीबीआई की आर्थिक अपराध इकाई-वी (ईओयू-वी) में शिकायत दर्ज कराई।

देहरादून स्थित वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा दो चरणों में किए गए फोरेंसिक जांच में 41 शॉल में तिब्बती मृग के फर के अंश पाए जाने की पुष्टि हुई।

अधिकारी ने बताया कि दोषी कशानी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49बी(1)/51(1ए) के तहत तीन साल के कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई, तथा अधिनियम की धारा 40 और 49 के तहत दो-दो साल की अतिरिक्त सजा भी साथ-साथ सुनाई गई।

भाषा धीरज रंजन

रंजन