नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने दो लोगों को गैर इरादतन हत्या का प्रयास करने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराया है। अदालत ने पाया कि बचाव पक्ष के गवाहों की गवाही में महत्वपूर्ण विवरणों की कमी थी और संभवतः उसमें हेरफेर किया गया था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने रुस्तम और मोहम्मद रिजवान को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), धारा 34 (सामान्य नीयत), धारा 509 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य) और धारा 506 (2) (मौत या गंभीर चोट की धमकी) के तहत अपराध करने का दोषी पाया। तीसरी आरोपी शहजादी को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना से कुछ सप्ताह पहले रिजवान द्वारा शिकायतकर्ता को बार-बार परेशान किया गया था। शिकायतकर्ता ने घटना से 15-20 दिन पहले उत्पीड़न के बारे में रिजवान के परिवार के सदस्यों को बताया था।
इसके चलते रिजवान ने शिकायतकर्ता को धमकी दी थी कि अगर उसने पुलिस से संपर्क किया तो वह उसे जान से मार देगा। 10 फरवरी, 2021 की रात को तीनों आरोपी उसके घर पहुंचे और जबरदस्ती अंदर घुस गए। तीनों आरोपियों ने उसे बेरहमी से पीटा, जिससे वह बेहोश हो गई।
इस मामले में सजा पर बहस के लिए 27 मार्च की तारीख तय की गई है।
भाषा शफीक नरेश
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