दिल्ली की अदालत ने तीस हजारी अदालत परिसर से गिरफ्तार वकील को जमानत दी

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दिल्ली की अदालत ने तीस हजारी अदालत परिसर से गिरफ्तार वकील को जमानत दी

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  • Publish Date - May 24, 2026 / 05:47 PM IST,
    Updated On - May 24, 2026 / 05:47 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने उस वकील को जमानत दे दी है, जिसे इस सप्ताह की शुरुआत में तीस हजारी अदालत परिसर में शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था।

वकील के पास मौजूद एक ट्रॉली बैग से कथित तौर पर दो पिस्तौल और आठ कारतूस बरामद होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति राजोरिया ने आरोपी हर्ष की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा कि केवल न्यायिक हिरासत के उद्देश्य से उन्हें लगातार जेल में रखना आवश्यक नहीं है।

अदालत ने 23 मई को दिये आदेश में कहा, ‘‘इस चरण में आरोपी हर्ष को लगातार जेल में रखना न्यायिक हिरासत के उद्देश्य से आवश्यक प्रतीत नहीं होता, खासकर तब जब जांच अधिकारी (आईओ) द्वारा आगे किसी हिरासत में पूछताछ का अनुरोध नहीं किया गया है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘इसलिए मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना, यह आवेदन खारिज किया जाता है।’’

अदालत ने कहा कि हालांकि आरोपी को कथित अवैध हथियारों की जानकारी और इन्हें अपने पास रखने का मुद्दा सुनवाई का विषय होगा, लेकिन जमानत पर विचार के दौरान बचाव पक्ष द्वारा उजागर की गई कुछ परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

अभियुक्त की ओर से पेश हुए बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि हर्ष ने अदालत के प्रवेश द्वार पर ट्रॉली बैग की स्कैनिंग की अनुमति दी थी, जो उनके दावे के अनुसार कथित हथियारों के बारे में अनभिज्ञता का संकेत देता है।

जांच अधिकारी ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी पहले ही जांच में शामिल हो चुका है और पुलिस टीम को उन स्थानों पर ले गया है, जो एक अन्य आरोपी राम सिंह से जुड़े हैं। सिंह वर्तमान में फरार है।

आईओ ने यह भी कहा कि आगे पुलिस हिरासत का अनुरोध नहीं किया जा रहा है और इसके बजाय न्यायिक हिरासत का अनुरोध किया गया है।

अदालत ने कहा कि आरोपी पेशे से अधिवक्ता बताया गया है और अभियोजन पक्ष द्वारा उनके किसी भी पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड का उल्लेख नहीं किया गया है।

अदालत ने कहा कि बरामदगी पहले ही हो चुकी है और उससे संबंधित महत्वपूर्ण जांच कार्य भी काफी हद तक पूरा किया जा चुका है।

अदालत ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘जमानत नियम है और जेल अपवाद है।’’

अदालत ने निर्देश दिया कि वह 25,000 रुपये के जमानत बॉण्ड और इतनी ही राशि का मुचलका जमा करें।

इसके अलावा अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाईं, जिनमें बुलाए जाने पर जांच में शामिल होना, अभियोजन पक्ष के गवाहों से संपर्क नहीं करना, सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करना और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश न छोड़ना शामिल है।

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप