दिल्ली: अदालत ने हिरासत में मौत के मामले में पीड़िता की याचिका पर कुलदीप सेंगर का पक्ष जानना चाहा
दिल्ली: अदालत ने हिरासत में मौत के मामले में पीड़िता की याचिका पर कुलदीप सेंगर का पक्ष जानना चाहा
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में 10 साल की कैद की सजा को मौत की सजा में बदलने के अनुरोध वाली याचिका पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर और अन्य आरोपियों का पक्ष जानना चाहा।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने पीड़िता की याचिका पर सेंगर और अन्य दोषियों को नोटिस जारी किया।
दुष्कर्म पीड़िता ने याचिका में 2020 के अधीनस्थ न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने में 1940 दिनों से अधिक की देरी को अनदेखा करने का अनुरोध किया गया है। अदालत ने कहा कि पहले अपील की स्वीकार्यता पर फैसला किया जाना चाहिए।
पीड़िता ने अपील में कहा कि सेंगर और अन्य दोषियों को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराया जाना चाहिए और उन्हें मौत की सजा दी जानी चाहिए।
अपील में अधीनस्थ न्यायालय के उस फैसले को संशोधित करने का अनुरोध किया गया, जिसमें सभी दोषियों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया गया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील ने कहा कि पीड़िता की अपील में मुख्य प्रतिवादी सेंगर व अन्य आरोपी हैं, और एजेंसी को इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं है।
पीठ ने पाया कि नौ फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को हिरासत में मौत के मामले में सेंगर की दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपील पर क्रम से पहले सुनवाई करने का निर्देश दिया था और कहा था कि इस पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए।
न्यायालय ने उच्च न्यायालय को पीड़िता की सजा बढ़ाने की अपील पर भी फैसला करने का निर्देश दिया था।
सेंगर को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का दोषी पाया गया था और 20 दिसंबर, 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
सेंगर ने 2017 में उस समय लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म किया था, जब वह नाबालिग थी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की 13 मार्च, 2020 को हिरासत में मौत के मामले में सेंगर व उसके भाई जयदीप सेंगर उर्फ अतुल सिंह को अधीनस्थ न्यायालय ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उनपर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। लड़की के पिता को आरोपी के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और पुलिस की बर्बरता के कारण नौ अप्रैल, 2018 को हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत

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