दिल्ली सरकार ने ईवी नीति को मंजूरी दी, ई-वाहनों को सड़क कर, पंजीकरण शुल्क से छूट

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दिल्ली सरकार ने ईवी नीति को मंजूरी दी, ई-वाहनों को सड़क कर, पंजीकरण शुल्क से छूट

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  • Publish Date - June 29, 2026 / 08:24 PM IST,
    Updated On - June 29, 2026 / 08:24 PM IST

नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) वाहन नीति को सोमवार को मंजूरी प्रदान कर दी जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी में 30 लाख रुपये कीमत तक की ई-गाड़ियों खरीदने पर न तो सड़क कर देना होगा और न ही पंजीकरण शुल्क लगेगा।

इस नीति का मकसद गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना और दिल्ली में स्वच्छ परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति में प्रस्तावित है कि मार्च 2030 तक दिल्ली के स्कूल की 30 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक होनी चाहिए। यह नीति शून्य-उत्सर्जन परिवहन के माध्यम से दिल्ली को प्रदूषण मुक्त राजधानी में बदलना चाहती है और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।

चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार करने के लिए शहर भर में लगभग 30,000 ईवी ‘चार्जिंग पॉइंट’ स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने इस परिवर्तिन को आगे बढ़ाने के लिए अगले चार वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिबद्धता जताई है।

हाइब्रिड’ वाहनों के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। नीति के तहत ईवी-संबंधित प्रोत्साहनों के लिए आवेदन करने के वास्ते एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जाएगा।

दिल्ली के पीएम 2.5 का सबसे बड़ा स्रोत गाड़ियों से होना वाला उत्सर्जन है। कुल पीएम 2.5 प्रदूषण में लगभग 50 प्रतिशत योगदान वाहनों से निकलने वाले धुएं और उनसे जुड़े उत्सर्जन का है।

पिछले साल 31 दिसंबर में जारी सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, गत वर्ष सर्दियों में सबसे ज्यादा प्रदूषण अवधि के दौरान, वाहनों ने शहर के स्थानीय पीएम 2.5 स्तरों में लगभग 46 प्रतिशत से 53 प्रतिशत का योगदान दिया था।

नीति के तहत, 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले सभी इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों के लिए सड़क कर और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक परिवहन को बढ़ावा देने और वाहन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए अगले चार वर्षों में नीति के तहत सरकारी निवेश, कर छूट और ईवी बुनियादी ढांचे के विकास सहित लगभग 15,000 करोड़ रुपये के लाभ प्रदान किए जाएंगे।

दिल्ली कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नीति, उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद एक जुलाई से लागू होगी। गुप्ता ने इसे 31 मार्च, 2030 तक दिल्ली को प्रदूषण मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति के तहत दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, एन-1 श्रेणी (साढ़े तीन टन तक माल ढोने वाले) के मालवाहक वाहन, एन2 (साढ़े तीन टन से 12 टन माल ढोने वाले) ट्रक और ग्रामीण सेवा वाहनों को शामिल किया गया है।

नई नीति परिवहन क्षेत्र पर विशेष जोर देती है और पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों में चरणबद्ध परिवर्तन के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने खरीदारों के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की है।

नई नीति के तहत ई-दो पहिया वाहन खरीदने वाले लोगों को पहले साल 30,000 रुपये, दूसरे साल 20,000 रुपये और तीसरे साल 10,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी।

इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों के खरीदार पहले, दूसरे और तीसरे वर्ष में क्रमशः 50,000 रुपये, 40,000 रुपये और 30,000 रुपये के प्रोत्साहन के पात्र होंगे।

एक अधिकारी के अनुसार, एन1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रकों के खरीदारों को एक लाख रुपये तक का खरीद प्रोत्साहन मिलेगा।

गुप्ता ने कहा कि सरकार ने किसी भी श्रेणी में प्रोत्साहन की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं की है और जितने लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगे, सरकार उतने ही लोगों को प्रोत्साहन प्रदान करेगी।

नीति के तहत एक जनवरी, 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटोरिक्शा पंजीकृत किए जाएंगे, जबकि नए पेट्रोल और सीएनजी दोपहिया वाहनों का पंजीकरण चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा और एक अप्रैल, 2028 से केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने के लिए सरकार ने आकर्षक स्क्रैपिंग प्रोत्साहन भी प्रदान किया है। इसके अंतर्गत बीएस-चार या उससे पुराने दोपहिया वाहन स्क्रैप करने पर 10,000 रुपये, तिपहिया पर 25,000 रुपये, चार पहिया वाहन पर एक लाख रुपये, एन-1 ट्रक पर 50,000 रुपये और ग्रामीण सेवा वाहन पर 15,000 रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा।”

गुप्ता ने कहा, “ सभी प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सब्सिडी पाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले को ईवी पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन करने के बाद 60 दिनों में प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। पोर्टल 1 जुलाई के बाद शुरू किया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का बड़ा हिस्सा व्यावसायिक मालवाहक वाहनों और दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के कारण है और इसी कारण नीति में इन श्रेणियों को विशेष प्राथमिकता दी गई है ताकि प्रदूषण में प्रभावी कमी लाई जा सके।

वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच, शहर में 4.07 लाख से ज़्यादा ईवी पंजीकृत किए गए।

स्वतंत्र रिसर्च संस्था, ‘एनवायरो कैटलिस्ट्स’ ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ‘वाहन’ डैशबोर्ड के डेटा का विश्लेषण किया। इस विश्लेषण से पता चला कि ईवी पंजीकरण2024-25 में 83,512 से बढ़कर 2025-26 में 1.07 लाख हो गया। इसी दौरान हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण भी 6,796 से बढ़कर 8,476 हो गया।

भाषा नोमान

नोमान माधव

माधव