नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) दिल्ली सरकार ने निर्माण मजदूरों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संरक्षण प्रदान करने के लिए दिल्ली भवन निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य योजना’ को मंगलवार को स्वीकृति प्रदान कर दी जिसके तहत उन्हें 10 लाख रुपये तक का नकद रहित इलाज मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि सरकार का अनुमान है कि इस योजना पर सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसमें कहा गया है कि ‘दिल्ली भवन एवं निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य योजना’ से 2.70 लाख पंजीकृत श्रमिकों सहित लगभग 10 लाख लोगों को लाभ होगा।
प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक सूचीबद्ध अस्पतालों में दो लाख रुपये तक के इलाज का हकदार होगा, जबकि एक परिवार के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये तक होगी।
मुख्यमंत्री ने बयान में कहा कि इलाज की पूरी प्रक्रिया नकद रहित होगी, जिससे श्रमिकों और उनके परिवारों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के परिवार के सदस्यों, जिनमें उनके पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल हैं, को भी नकद रहित उपचार सुविधा के तहत कवर किया जाएगा।
यह योजना पंजीकृत श्रमिकों और उनके जीवनसाथियों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच भी प्रदान करेगी।
इसके अतिरिक्त निःशुल्क ओपीडी एवं आईपीडी सेवाएं, जांच एवं प्रयोगशाला सुविधाएं, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, रेफरल सेवाएं तथा निर्माण स्थलों और श्रमिक बहुल क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल इकाइयों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे और एक आधुनिक लाभार्थी ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा श्रमिकों की सहायता के लिए 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी संचालित की जाएगी।
गुप्ता ने कहा कि निर्माण श्रमिक राजधानी के विकास की नींव हैं और उनके स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “निर्माण कार्यों से जुड़े श्रमिकों को अपने कार्य के दौरान पत्थरों को काटने से निकली धूल, रसायनों, अत्यधिक शोर, भारी मशीनों, सामान्य धूल और कठिन श्रम जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके कारण उन्हें सिलिकोसिस (फेफड़ों की बीमारी), श्वसन संबंधी रोग, त्वचा रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बना रहता है। लंबे समय से इस वर्ग के लिए किसी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का अभाव था, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है।”
भाषा नोमान
नोमान माधव
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