नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में वंचना अंक के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया जारी रखने की मंगलवार को अनुमति दे दी।
इससे पहले, कुछ अभ्यर्थियों को ‘वंचना अंक’ दिए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत की एकल पीठ ने प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
देश के कुछ पिछड़े इलाकों से आने वाले अभ्यर्थियों को ‘वंचना अंक’ दिए जाते हैं।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एकल पीठ के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि प्रवेश इस चुनौती याचिका के नतीजे पर निर्भर करेंगे।
विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के इच्छुक अमित मेहरा नामक अभ्यर्थी की याचिका पर 14 अगस्त को एकल पीठ ने वंचना अंक के आधार पर होने वाले प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा था कि 24 अगस्त तक प्रवेश को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा और इस संबंध में कोई और कदम नहीं उठाया जाएगा।
जेएनयू द्वारा एकल पीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए दो न्यायाधीशों की पीठ ने टिप्पणी की कि वंचना अंक प्रदान करने की प्रथा 1974 से मौजूद है और एकल पीठ के आदेश के कारण पूरी प्रवेश प्रक्रिया ‘ठप्प’ हो गई है।
पीठ ने सवाल उठाया गया कि ऐसी राहत के पक्ष में प्रथमदृष्टया कोई निष्कर्ष नहीं होने के बावजूद अंतरिम रोक को कैसे बरकरार रखा जा सकता है।
अदालत ने आदेश दिया, “विश्वविद्यालय ई-प्रॉस्पेक्टस में दिए गए प्रावधानों के अनुसार दाखिला प्रक्रिया जारी रखे, जिसमें वे प्रावधान भी शामिल हैं जिन्हें एकल न्यायाधीश के समक्ष चुनौती दी गई है। हालांकि, इसके तहत किए गए किसी भी दाखिले का भविष्य रिट याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
भाषा धीरज पवनेश
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