नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय के वकीलों ने सोमवार को जिला न्यायालयों के आर्थिक क्षेत्राधिकार में प्रस्तावित वृद्धि का विरोध करने के लिए काम नहीं किया।
वकीलों के न्यायाधीशों के समक्ष पेश न होने के कारण, उच्च न्यायालय में सूचीबद्ध अधिकांश मामलों की सुनवाई बाधित हुई।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) ने 23 मई को अपने सदस्यों से 25 मई को काम से दूर रहने का आग्रह किया था, क्योंकि उच्च न्यायालय प्रशासन ने दिल्ली के सभी जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति की काफी समय से लंबित मांग पर विचार करने का कदम उठाया था, जिसमें जिला न्यायालयों की वित्तीय सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की मांग की गई थी।
जिला न्यायालय बार एसोसिएशनों के अनुसार, दीवानी अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाना दिल्ली के नागरिकों के व्यापक हित में है और इससे त्वरित न्याय सुनिश्चित होता है।
डीएचसीबीए ने हालांकि यह तर्क दिया है कि उच्च न्यायालय के पास इस तरह का बदलाव लाने की कोई शक्ति नहीं है, क्योंकि यह विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
जिला अदालत बार एसोसिएशनों ने इससे पहले डीएचसीबीए द्वारा “जिला न्यायालयों के वित्तीय क्षेत्राधिकार (वित्तीय सीमा) को मौजूदा 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने की वैध और काफी समय से लंबित मांग के विरोध में हड़ताल के आह्वान की कड़ी निंदा और विरोध किया था”।
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प्रशांत संतोष
संतोष