नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय टेबल टेनिस महासंघ (टीटीएफआई) के महासचिव पद से कमलेश मेहता के निलंबन को सोमवार को रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति पुरूषेंद्र कुमार कौरव ने हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी को ‘जांच प्राधिकारी’ नियुक्त किया है, जो टीटीएफआई और उसके पदाधिकारियों के आचरण एवं कार्यप्रणाली की जांच करेंगे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय खेल महासंघ के संचालन और शीर्ष पदाधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए इस तरह की जांच आवश्यक है।
अदालत ने कहा कि वह इन आरोपों से आंखें नहीं मूंद सकती, खासकर तब जब महासंघ में दो गुटों के बीच नियंत्रण और प्रभाव को लेकर संघर्ष चल रहा हो और खेल व खिलाड़ी पीछे छूट रहे हों।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘निलंबन आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन के कारण रद्द किया जाता है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।’’
अदालत ने आदेश में कहा, ‘‘न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कृष्ण मुरारी को टीटीएफआई के पदाधिकारियों सहित उसके संचालन और कार्यप्रणाली की जांच के लिए जांच प्राधिकारी नियुक्त किया जाता है।’’
मेहता को 28 जनवरी को टीटीएफआई की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान निलंबित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
टीटीएफआई ने कहा था कि निलंबन का निर्णय गंभीर प्रक्रियात्मक उल्लंघनों, प्रशासनिक खामियों और वित्तीय अनियमितताओं की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया था।
महासंघ ने यह भी आरोप लगाया था कि मेहता ने 28 जनवरी को होने वाली एजीएम के बावजूद 17 जनवरी को एक विशेष आम बैठक (एसजीएम) बुलाई थी, जो नियमों के खिलाफ थी।
वहीं मेहता ने अदालत में टीटीएफआई अध्यक्ष द्वारा लिए गए कई फैसलों, विशेषकर सीईओ की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे।
अपनी याचिका में मेहता ने कहा था कि उनका निलंबन टीटीएफआई के संविधान, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि पूरी प्रक्रिया मनमानी और दुर्भावनापूर्ण थी तथा उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि निष्कासन का अंतिम निर्णय उसी तदर्थ समिति के पास भेजा गया है जिसने प्रारंभिक निलंबन आदेश दिया था।
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