दिल्ली मास्टर प्लान: शहरी खेती पर जोर, इमारतों और भूखंडों का होगा उपयोग

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दिल्ली मास्टर प्लान: शहरी खेती पर जोर, इमारतों और भूखंडों का होगा उपयोग

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 08:36 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 08:36 PM IST

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) दिल्ली के नए मास्टर प्लान में इसे अधिक हरी-भरी और टिकाऊ राजधानी बनाने के दृष्टिकोण के तहत सब्जयों की खेती, छत पर खेती, ऊर्ध्वाधर उद्यान (वर्टिकल गार्डन) और यहां तक कि ‘हाइड्रोपोनिक्स’ और ‘एक्वापोनिक्स’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। शहरी खेती जल्द ही दिल्ली के नजारे का एक प्रमुख हिस्सा बन सकती है।

‘हाइड्रोपोनिक्स’ खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मिट्टी के बिना पौधे उगाए जाते हैं। इसमें पौधों की जड़ों को पानी में घुले पोषक तत्व (जरूरी खनिज और खाद) दिए जाते हैं, जिससे पौधे बढ़ते हैं। वहीं ‘एक्वापोनिक्स’ खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसमें मछली पालन और पौधों की खेती एक साथ की जाती है।

बृहस्पतिवार को जारी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 (एमपीडी 2047) में इमारतों और भूखंडों के स्तर पर शहरी खेती तथा सामुदायिक उद्यान विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत निवासी और समुदाय शहर में बेकार पड़ी जगहों का इस्तेमाल खाद्य उत्पादन के लिए कर सकेंगे।

योजना के तहत घरों की छतों, खाली पड़ी जमीनों और सामुदायिक जगहों पर कई तरह की शहरी खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई। इनमें सब्जी उद्यान, गमलों में खेती, औषधीय पौधों की बागवानी, ऊर्ध्वाधर खेती, ‘हाइड्रोपोनिक्स’ और ‘एक्वापोनिक्स’ शामिल हैं।

घनी आबादी वाले दिल्ली जैसे शहर में (जहां पारंपरिक खेती के लिए जमीन की उपलब्धता सीमित है) शहरी खेती की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मास्टर प्लान के अनुसार, खाली भूखंडों का इस्तेमाल अस्थायी तौर पर शहरी खेती या बागवानी के लिए किया जा सकता है। वहीं, इमारतों के अंदर ऊर्ध्वाधर खेती को भवन की संरचनात्मक सुरक्षा संबंधी मानकों को पूरा करने की शर्त पर अनुमति दी जाएगी।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश