दिल्ली: एमसीडी ने धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सतही पार्किंग व्यवस्था में सुधार की योजना बनाई

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दिल्ली: एमसीडी ने धूल प्रदूषण को कम करने के लिए सतही पार्किंग व्यवस्था में सुधार की योजना बनाई

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  • Publish Date - April 8, 2026 / 06:42 PM IST,
    Updated On - April 8, 2026 / 06:42 PM IST

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर विशेष ध्यान देते हुए सभी 12 जोन में स्थित सतही पार्किंग स्थलों के सुधार की योजना बना रहा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि पुनर्विकास के लिए लगभग 130 सतही पार्किंग स्थलों की पहचान की गई है।

नगर निगम का इंजीनियरिंग विभाग इस काम को अंजाम देगा, जिसमें मुख्य रूप से धूल के फैलाव को रोकने के लिए ‘इंटरलॉकिंग पेवर ब्लॉक’ (पार्किंग में टाइल) बिछाना शामिल होगा। धूलकण का बिखरना एक ऐसा मुद्दा है, जो कम बारिश वाले महीनों में बढ़ जाता है और वायु प्रदूषण के स्तर को खराब करता है।

एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘रामलीला मैदान और कीर्ति नगर टिम्बर मार्केट जैसे प्रमुख पार्किंग स्थल उन जगहों में शामिल हैं जिन्हें सूची में शामिल किया गया है।’’

मानसून के दौरान ये खुले भूखंडों पर बने पार्किंग स्थल अक्सर कीचड़युक्त हो जाते हैं और उनमें बहुत धूल जमा हो जाती है जो उपयोगकर्ताओं के लिए असुविधा पैदा करती है।

एक यात्री ने कहा, ‘‘एक बार मैंने अपनी कार रामलीला मैदान में खड़ी की थी और मेरे जूते बहुत गंदे हो गए। उस दिन मेरी एक महत्वपूर्ण बैठक थी और ऑफिस जाने से पहले मुझे मोची ढूंढने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लग गया।’’

एमसीडी ने बुनियादी ढांचे के उन्नयन के अलावा पार्किंग संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।

कई पार्किंग स्थलों पर अधिक शुल्क वसूलने की शिकायतों के बाद एक अधिकारी ने कहा, ‘‘क्षेत्रीय निरीक्षकों को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पार्किंग शुल्क वसूलने वाले सभी ठेकेदार वर्दी पहनें।’’

अधिकारियों ने बताया कि एमसीडी द्वारा आने वाले महीनों में राष्ट्रीय राजधानी में चार लाख से अधिक ‘‘स्मार्ट’’ ‘स्ट्रीटलाइट’ लगाई जाएंगी।

उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से एलईडी आधारित ये लाइट ‘दूरस्थ निगरानी प्रणाली’ पर केंद्रित हैं। इन ‘स्ट्रीटलाइट’ को मध्य, दक्षिणी, नजफगढ़ और पश्चिमी क्षेत्रों में लगाया जाएगा।

भाषा

यासिर सुरेश

सुरेश