दिल्ली पुलिस ने कतर, दुबई से जुड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया; नौ गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने कतर, दुबई से जुड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया; नौ गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने कतर, दुबई से जुड़े साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया; नौ गिरफ्तार
Modified Date: August 11, 2026 / 06:04 pm IST
Published Date: August 11, 2026 6:04 pm IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली पुलिस ने निवेश के नाम पर देशभर में साइबर ठगी करने और ‘म्यूल’ बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम की कथित रूप से हेराफेरी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के अनुसार, जांच में इस गिरोह के बैंक खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 34 शिकायतों में शामिल मिले हैं, जिनमें 15.71 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई। इनमें दिल्ली में दर्ज साइबर ठगी के सात मामले भी शामिल हैं, जिनमें करीब 2.70 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

पुलिस ने बताया कि जांच में कतर स्थित व्यक्तियों के साथ संदिग्ध संबंधों का पता चला है, जबकि डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ से संकेत मिला है कि दुबई में मौजूद सहयोगियों के जरिए गिरोह की गतिविधियों का संचालन किया जा रहा था।

दक्षिण पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) अमित गोयल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केरल के कासरगोड निवासी जमालुद्दीन फैसल (30), पंजाब के अमृतसर निवासी सरबजीत सिंह (43) और सोनिया शर्मा (42), महाराष्ट्र के नंदुरबार निवासी शोएब दिलावर सैयद (26), गुजरात के सूरत निवासी सिद्दीकी महमदसिद्दीक मुफीदभाई (30), शेख रियाजुद्दीन इम्तियाज (29) और कमालशा कादरशाह (30), गुजरात के फोर्ट सोंगढ़ निवासी हमजा हुमायूं (26) तथा केरल के कासरगोड निवासी मुजम्मिल थैब (20) के रूप में हुई है।

उनके अनुसार, गिरोह का भंडाफोड़ पालम कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति की शिकायत की जांच पर हुआ। शिकायतकर्ता को निवेश के गुर सिखाने के नाम पर व्हाट्सऐप समूहों में जोड़ा गया था और आरोपियों ने बाजार विश्लेषकों व निवेश विशेषज्ञों के रूप में खुद को पेश कर फर्जी ट्रेडिंग सत्र, सफलता की कहानियां और स्क्रीनशॉट दिखाकर उसका विश्वास जीता तथा उसे एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश के लिए राजी किया।

पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता ने मंच को असली समझकर विभिन्न बैंक खातों के जरिए 4.82 लाख रुपये अंतरित किए और वह शुरुआत में थोड़ी रकम निकाल सका, लेकिन बाद में आरोपियों ने आईपीओ आवंटन के नाम पर और पैसे की मांग की।

पुलिस ने बताया कि इसके बाद ठगी का संदेह होने पर शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की, जिसके बाद दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

डीसीपी ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने रकम के लेन-देन और आरोपियों के डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी कारोबारी संस्थाएं बनाकर उनके नाम पर चालू खाते खुलवाता था और इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को आगे भेजने के लिए किया जाता था।

उनके मुताबिक, बैंक खातों की जानकारी और खाते से जुड़े दस्तावेज व्हाट्सऐप समूहों में साझा किए जाते थे।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र से गिरफ्तार शोएब से पूछताछ और उसके मोबाइल फोन की जांच में आपत्तिजनक चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले। पुलिस ने पाया कि उसने चार अन्य लोगों के साथ केरल की यात्रा की थी, जहां कथित तौर पर व्यापारिक संस्थाएं बनाई गईं और चालू खाते खोले गए।

अधिकारी ने बताया कि गुजरात से गिरफ्तार चार आरोपियों ने कथित तौर पर पैसे के बदले अपने चालू खाते उपलब्ध कराए थे।

पुलिस ने बताया कि केरल से गिरफ्तार आरोपियों पर खाता धारकों के साथ समन्वय करने, उनके ठहरने की व्यवस्था करने तथा बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित ओटीपी साझा करने का आरोप है।

पुलिस ने बताया कि पंजाब से गिरफ्तार दो आरोपी कथित तौर पर बैंक खातों और ठगी की रकम को इधर-उधर करने से जुड़े थे।

पुलिस ने कहा कि विदेश स्थित कथित सदस्यों सैम, रिया और फरहाज़ और एक बैंक कर्मचारी की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं, जिनमें आपत्तिजनक व्हाट्सऐप चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने के फॉर्म, डिजिटल जानकारियां और लेनदेन संबंधी रिकॉर्ड मिले हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।

भाषा नोमान नोमान दिलीप

दिलीप


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