नौ घंटे की पूछताछ में दिल्ली पुलिस ने किसी से संपर्क नहीं करने दिया: पूर्व अधिकारी आशीष जोशी

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नौ घंटे की पूछताछ में दिल्ली पुलिस ने किसी से संपर्क नहीं करने दिया: पूर्व अधिकारी आशीष जोशी

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 02:28 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 02:28 PM IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि निर्वाचन आयोग से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में दिल्ली पुलिस ने उनसे करीब नौ घंटे तक पूछताछ की और इस दौरान उन्हें उनकी पत्नी से संपर्क नहीं करने दिया गया और वह कहां हैं, इसके बारे में बताने की इजाजत भी नहीं दी गई।

दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने बुधवार को जोशी से निर्वाचन आयोग से जुड़ी पोस्ट के मामले में पूछताछ की।

नौ घंटे की पूछताछ के बाद शाम को जोशी को छोड़ दिया गया। बताया जाता है कि न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में विशेष प्रकोष्ठ की ‘काउंटर-इंटेलिजेंस यूनिट’ के कार्यालय के बाहर कई लोगों के उनकी रिहाई की मांग करते हुए जमा होने के बाद पुलिस उन्हें घर ले गई।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दूरसंचार विभाग में पूर्व संचार नियंत्रक जोशी को दो दिन पहले दर्ज एक मामले में पूछताछ के लिए चाणक्यपुरी से लाया गया था।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 192 के तहत मामला दर्ज किया गया, जो दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने या उसकी जानकारी होने से संबंधित है।

सूत्रों ने बताया कि जोशी ने हाल में सोशल मीडिया पर निर्वाचन आयोग के बारे में पोस्ट किया था।

जोशी ने ‘एक्स’ एक पोस्ट में दावा किया कि सुबह की सैर के बाद उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि इसमें ‘‘बहुत कम समय’’ लगेगा।

पूर्व नौकरशाह ने दावा किया कि उन्होंने बार-बार पुलिस से कहा कि वह अपनी ‘लोकेशन’ के बारे में पत्नी को सूचित करना चाहते हैं लेकिन इसके बावजूद उनसे कहा गया कि वे सिर्फ ‘‘निर्देशों का पालन’’ कर रहे हैं।

जोशी ने कहा कि आखिरकार शाम छह बजकर 38 मिनट पर उन्हें फोन करने की इजाजत मिली जबकि पूरे दिन उनका परिवार और दोस्त ‘‘बहुत घबराए हुए’’ रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का बर्ताव डी. के. बसु मामले में उच्चतम न्यायालय के अहम फैसले का ‘‘खुला उल्लंघन’’ था और कहा कि हिरासत में लिए जाने पर परिवार के किसी सदस्य या मित्र को सूचित करना अनुच्छेद 22(1) के तहत एक संवैधानिक अधिकार है।

वर्ष 1997 में डी. के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में फैसले के दौरान शीर्ष अदालत ने पुलिस अधिकारियों के लिए गिरफ्तार/हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी नियम तय किए थे।

जोशी ने पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली पुलिस से यह भी आग्रह किया कि वे सभी इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जब किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाए या पूछताछ के लिए ले जाया जाए तो उसके परिवार को तुरंत सूचित किया जाए।

इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश