नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस राष्ट्रीय राजधानी में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी, लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली सरकार के बृहस्पतिवार को एक आदेश में यह जानकारी दी गयी।
गृह विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि इन मामलों में अगर पहले ही गिरफ्तारियां या हिरासत की कार्रवाई हो चुकी है, तो गिरफ्तारियों की समीक्षा करने और गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी।
विभाग ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के संबंध में 29 जुलाई शाम छह बजे तक 13 प्राथमिकी दर्ज की हैं।
पुलिस ने विरोध मार्च में शामिल आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,800 से अधिक लोगों की पहचान भी की है।
गृह विभाग ने आदेश में कहा, “दिल्ली सरकार का विरोध-प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई और दंडात्मक कार्रवाई करने का इरादा नहीं है, और इन मामलों को बिना किसी आगे की कार्रवाई के बंद माना जाएगा।”
आदेश में हालांकि कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को यह संरक्षण नहीं मिलेगा।
इस बीच दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि जंतर-मंतर पर हाल में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रदर्शन को लेकर दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने में उन प्रदर्शनकारियों को राहत नहीं मिलेगी, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जो हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल थे।
सूद ने इस बात पर जोर दिया कि भारत सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि असहमति व्यक्त करने वाले छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘लेकिन यह छूट उन लोगों पर लागू नहीं होगी जिनके खिलाफ पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं और जिन्होंने हिंसा और तोड़फोड़ की थी।’
कॉजपा के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान 20 जुलाई को लुटियंस दिल्ली में हिंसा भड़क गई थी।
कॉजपा के 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले, दिल्ली पुलिस ने नयी दिल्ली जिले और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी थी, बड़ी संख्या में कर्मियों, अर्द्धसैनिक बलों, बैरिकेड, दंगा-रोधी उपकरण और नेटवर्क जैमर को तैनात किया था।
पुलिस ने कहा था कि संसद की ओर मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी और स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनकारियों को उच्च सुरक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
व्यवस्था बनाए रखने की बार-बार की गई अपील विफल होने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। पुलिस के अनुसार, हिंसा में लगभग 200 कर्मी और 65 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए।
पुलिस ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान 15 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त किए गए थे।
दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियों का इस्तेमाल करने के लिए कुछ सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ विशेष प्रकोष्ठ थाने में प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,800 से अधिक लोगों की पहचान भी की है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने जंतर-मंतर पर लगे ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम” (एफआरएस) हाई रेजोल्यूशन कैमरे का इस्तेमाल कर ऐसे लोगों की पहचान की है।
झड़प के बाद दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने बाद में स्पष्ट किया कि हिरासत में लिये गए सभी लोगों को रिहा कर दिया गया।
भाषा नोमान सुरेश
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