नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने मणिपुर में हालिया हिंसा में दो बच्चों की मौत के मामले की जांच जल्द से जल्द पूरी करने की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि प्रदेश में शांति बहाली के लिए सभी हितधारकों के साथ बातचीत आरंभ की जाए।
पार्टी सांसद ए. विमल अकोइजम ने यह भी कहा कि नागरिकों को गैर-नागरिकों से अलग करने की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया स्थापित होने तक जनगणना स्थगित की जाए।
मणिपुर में बीते सात अप्रैल को हुए बम हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी।
इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अकोइजम ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है। इसके बजाय वे महिला आरक्षण के नाम पर एक विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश में व्यस्त थे।’’
उन्होंने दावा किया कि भारत सरकार ने बिना किसी कानूनी आधार के मणिपुर में ‘बफर जोन’ बनाए हैं।
अकोइजम ने कहा, ‘‘कोई कानूनी आदेश न होने के बावजूद सुरक्षा बलों ने मुझे अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में जाने से रोक दिया है। यह असंवैधानिक है।’’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘‘बीते सात अप्रैल की घटना इन तथाकथित बफर जोन में से एक के भीतर हुई। एक पुलिस थाना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की एक टुकड़ी कुछ ही किलोमीटर दूर थी, फिर भी किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वे कई घंटों के बाद पहुंचे, जो गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि दोनों बच्चों की हत्या की जांच जल्द से जल्द पूरी हो, हिंसक गतिविधियों पर अंकुश लगाया जाए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, राज्य में कानून एवं व्यवस्था को बहाल एवं सुदृढ़ किया जाए, कानून-व्यवस्था पर राज्य के अधिकार को कमजोर करने वाली सभी कार्रवाइयां रोकी जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि नागरिकों को घरों और आवश्यक सेवाओं तक सुरक्षित और निर्बाध पहुंच हो।’’
अकोइजम ने कहा कि तीन मई, 2023 की हिंसा की जांच के निष्कर्षों को पूरा करके और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने केंद्र सरकार से यह आग्रह भी किया, ‘‘जारी हिंसा के प्रभाव को संबोधित करने के लिए एक आर्थिक पैकेज की घोषणा की जाए, सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी हितधारकों के बीच बातचीत शुरू हो और नागरिकों को गैर-नागरिकों से अलग करने की स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया स्थापित होने तक जनगणना को स्थगित की जाए।’’
भाषा हक हक संतोष
संतोष