(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 20 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को नीट के प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के मामले को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए केंद्र सरकार पर संवाद के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।
संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद मार्ग के निकट कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के हजारों समर्थकों ने ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान कथित तौर पर अवरोधक तोड़ने के प्रयास किये, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में प्रदर्शन से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं आज दिल्ली में हमारे युवाओं और छात्रों पर की गई पुलिस की बर्बरता की कड़ी निंदा करती हूं।’’
ममता बनर्जी ने सवाल किया, ‘‘यह कैसी सरकार है जो अपने ही छात्रों से डरती है? यह कैसा लोकतंत्र है जो बातचीत के बजाय सवालों का जवाब लाठी और आंसू गैस से देता है?’’
बनर्जी ने कहा कि असहमति जताना लोकतांत्रिक अधिकार है और देश ‘‘इसके छात्रों, किसानों, महिलाओं, श्रमिकों और हर नागरिक का है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘असहमति अपराध नहीं है। बर्बरता शासन नहीं हो सकती।’’
ममता बनर्जी ने साथ ही आरोप लगाया कि 21 जुलाई को कोलकाता में होने वाली सालाना ‘शहीद दिवस’ रैली से पहले उनकी पार्टी के धड़े को बैठकें और जुलूस निकालने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद समर्थक इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता आ रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य कोलकाता के बिड़ला तारामंडल इलाके में तैयारियों का जायजा लेने के बाद यह दावा किया।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनके गुट को वहां रैली करने की अनुमति मिली है।
बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारी सभाओं और जुलूसों की इजाजत नहीं दी जा रही है। दूर-दराज के जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं को ठहरने की जगह तक नहीं मिल रही है। फिर भी, वे स्नेह के कारण आ रहे हैं।’’
भाषा
शुभम धीरज
धीरज