संशोधित मिजो विवाह कानून के तहत पुनर्विवाह के लिए तलाक प्रमाणपत्र अनिवार्य
संशोधित मिजो विवाह कानून के तहत पुनर्विवाह के लिए तलाक प्रमाणपत्र अनिवार्य
आइजोल, तीन सितंबर (भाषा) मिजो विवाह कानून में किए गए संशोधन के तहत, पति या पत्नी से अलग होने के बाद पुनर्विवाह करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए अदालत द्वारा जारी तलाक प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। यह जानकारी मिजो विवाह और संपत्ति के उत्तराधिकार अधिनियम की समीक्षा समिति ने बृहस्पतिवार को दी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कानून एवं न्याय विभाग के अतिरिक्त सचिव जाह्मिंगथांगा राल्ते की अध्यक्षता वाली समिति ने यहां बैठक कर प्रथागत रीति-रिवाजों और मिजो विवाह एवं संपत्ति के उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधानों की समीक्षा की। इस कानून को राज्य विधानसभा ने फरवरी में पारित किया था।
समिति ने कहा कि संशोधित कानून के अनुसार, तलाक प्रमाणपत्र की जांच करने की जिम्मेदारी विवाह संपन्न कराने वाले व्यक्ति पर डाली गई है।
समिति ने कहा कि गिरजाघर अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में विवाह और पुनर्विवाह को विनियमित करना जारी रख सकते हैं। हालांकि, संशोधित कानून के तहत दोबारा विवाह करने के इच्छुक तलाकशुदा व्यक्ति को यह प्रमाणित करना होगा कि उसका पिछला विवाह कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है।
समिति ने कहा कि तलाक प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए बिना दोबारा विवाह करने वाले व्यक्ति को परिस्थितियों के आधार पर सात से 10 साल तक की सजा हो सकती है। समिति ने ऐसे विवाह की योजना बनाने या उसे आयोजित कराने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।
गिरजाघरों से यह भी अनुरोध किया गया है कि विवाह प्रमाणपत्रों में “तलाक” शब्द की जगह “मिजो विवाह एवं संपत्ति के उत्तराधिकार अधिनियम, 2014 के अनुसार” शब्दावली का इस्तेमाल करें।
बैठक में सरकार, गिरजाघर, नागरिक समाज संगठनों, मिजोरम महिला आयोग, मिजोरम विश्वविद्यालय और अन्य विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भाषा तान्या शफीक
शफीक

Facebook


