नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) दिल्ली जल बोर्ड उपभोक्ता संपत्तियों को जियो-टैग करके और प्रत्येक उपभोक्ता परिसर को एक विशिष्ट ग्राहक परिसर पहचान संख्या आवंटित करके अपनी बिल प्रक्रियाओं में सुधार करने जा रहा है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इस बिजली कंपनी के पास लगभग 29 लाख पंजीकृत उपभोक्ता हैं। हालांकि, इनमें से केवल 40 प्रतिशत उपभोक्ताओं को ही पानी के सही बिल मिलते हैं।
दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के एक अधिकारी ने कहा, ‘मौजूदा कामकाज का तरीका, पुरानी प्रक्रियाएं, हाथ से किए जाने वाले काम और बिखरे हुए फील्ड ऑपरेशन के कारण बिल की सही गणना, उपभोक्ता डेटा की गुणवत्ता, सेवा की पारदर्शिता और राजस्व की दक्षता से जुड़ी समस्याएं पैदा हुई हैं।’
इन समस्याओं के समाधान के लिए, डीजेबी राजस्व सहायता सेवाओं के प्रबंधन के लिए एक उद्योग विशेषज्ञ को नियुक्त करने की योजना बना रहा है। इसमें बिल वितरण, स्पॉट बिलिंग सुविधा, कॉल सेंटर निगरानी और शिकायत निवारण शामिल हैं।
हालांकि डीजेबी वर्तमान में स्थापित मीटरों के आधार पर उपभोक्ताओं के पते रखता है, फिर भी समय पर और सटीक बिलिंग की कमी के संबंध में लगातार शिकायतें बनी रहती हैं।
डीजेबी के अधिकारियों के अनुसार, बोर्ड अपनी संपूर्ण बिल प्रक्रिया को संभालने के लिए एक कंपनी की तलाश कर रहा है।
इस योजना में प्रत्येक उपभोक्ता परिसर को अक्षांश और देशांतर निर्देशांकों के माध्यम से जियो-टैग करना शामिल है, ताकि मौजूदा केएनओ नंबर के अतिरिक्त कस्टमर प्रिमाइस आइडेंटिफिकेशन (सीपीआईडी) नंबर तैयार कर उन्हें मानचित्र पर दर्शाया जा सके।
अपनी बिल प्रणालियों को सुदृढ़ करके, डीजेबी का उद्देश्य स्थान की सटीकता सुनिश्चित करना और अपने रिकॉर्ड से दोहराव वाले या गलत परिसरों को हटाना है।
भाषा नोमान माधव
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