श्रुति भारद्वाज
नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) तांबे के तारों की बार-बार चोरी होने के कारण दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) को अपने नेटवर्क में रणनीतिक बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। निगम ने नेटवर्क को चोरी से बचाने के लिए 175 किलोमीटर के क्षेत्र में तांबे के तारों को एल्युमीनियम के तारों से बदलने की योजना बनाई है।
डीएमआरसी अगले 18 महीनों में 33 किलोवोल्ट (केवी) तांबे की तारों को एल्युमिनियम से बदलने के लिए 32.59 करोड़ रुपये का व्यय करेगी।
निगम के अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा 33 किलोवोल्ट तांबे के तारों को हटाकर उनकी जगह एल्युमिनियम के तार लगाए जाएंगे।
इस सुधार का लक्ष्य नेटवर्क के सबसे संवेदनशील हिस्सों को ठीक करना है, जिनमें नदी तल के पास यमुना बैंक लाइन, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन और सीलमपुर और वेलकम स्टेशनों के पास पिंक लाइन शामिल हैं।
डीएमआरसी ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य सहायक बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता में सुधार करना है। तांबे की चोरी के कारण अक्सर बिजली आपूर्ति बाधित होती है और सिग्नल में गड़बड़ी होती है, जिससे ट्रेनों को सीमित गति से चलना पड़ता है और देरी होती है।
पिछले साल तार चोरी के 89 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 32 मामले सिग्नल तार और 22 मामले बिजली के तारों से संबंधित थे। पिछले साल मार्च में सीलमपुर और वेलकम स्टेशनों के बीच हुई एक बड़ी घटना में सिग्नल सिस्टम बुरी तरह से बाधित हो गया, जिसके चलते ट्रेनों को मानसरोवर पार्क और सीलमपुर के बीच 25 किमी प्रति घंटे की धीमी गति से चलना पड़ा। इस व्यवधान का असर रेड लाइन पर भी पड़ा, जिससे यात्रियों को पूरे दिन के लिए यात्रा में देरी हुई।
मेट्रो प्रणाली सैकड़ों किलोमीटर लंबे तारों पर निर्भर करती है जो पुलों और सुरंगों से होकर गुजरते हैं तथा कर्षण, दूरसंचार और विद्युत प्रणालियों को सहारा देते हैं। इन केबलों को कोई भी क्षति होने से अनावश्यक देरी होती है। परिचालन के दौरान क्षतिग्रस्त केबलों को बदलना चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा होता है क्योंकि ट्रेनें हर तीन से पांच मिनट में चलती हैं।
भाषा तान्या माधव
माधव